अमरोहा, 03 नवंबर। पौराणिक तिगरी गंगा धाम पर मंगलवार को भारतीय किसान यूनियन (संयुक्त मोर्चा) के तत्वावधान में आयोजित ‘किसान युवा संसद’ को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश चौधरी ने केंद्र व प्रदेश सरकार पर जमकर निशाना साधा। नरेश चौधरी ने तीखे तेवर अपनाते हुए कहा, “किसानों की गन्ने की फसल का सही दाम न मिलना और गजरौला में औद्योगिक इकाइयों द्वारा पर्यावरण का विनाश किया जाना अब किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। 1996 से किसान बकाया भुगतान पर ब्याज के हक के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन शासन-प्रशासन मौन साधे बैठा है। अगर सरकार ने हमारी मांगों पर समयबद्ध कार्रवाई नहीं की, तो किसान सड़कों पर उतरकर ऐसा व्यापक आंदोलन करेंगे कि प्रशासन को जवाब देना भारी पड़ जाएगा।”

वैदिक अनुष्ठान, दुग्धाभिषेक और महायज्ञ के उपरांत राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित इस युवा संसद में गन्ने का मूल्य 5,000 रुपये प्रति टन (₹500 प्रति क्विंटल) करने, बकाया भुगतान पर 15 प्रतिशत ब्याज दिलाने, गजरौला औद्योगिक क्षेत्र की संयुक्त जांच कराने और तिगरी मेले के पिछले दस वर्षों के ठेकों की उच्चस्तरीय पड़ताल कराने की पुरजोर मांग उठाई गई।
युवा संसद में वक्ताओं ने रेखांकित किया कि नियमतः गन्ना खरीद के 14 दिन के भीतर भुगतान न होने पर 15 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने के अदालती आदेश हैं, जिनका पालन कराने में सरकारें विफल रही हैं। खेती की बढ़ती लागत को देखते हुए गन्ने का समर्थन मूल्य ₹5,500 प्रति टन करने, एफआरपी तय करने के लिए बेस रिकवरी 9.5 प्रतिशत करने, केंद्र की एथेनॉल नीति की समीक्षा करने और किसानों को 200 यूनिट मुफ्त बिजली देने पर जोर दिया गया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित ज्ञापन के माध्यम से गजरौला औद्योगिक क्षेत्र विशेषकर इजराइल की कंपनी टेवा एपीआई इकाई की राजस्व, उद्योग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व भूजल विभाग की संयुक्त टीम से जांच कराने की मांग की गई। साथ ही, पुराने नक्शों के आधार पर सार्वजनिक रास्तों, चकमार्गों व तालाबों को अतिक्रमणमुक्त कराने पर बल दिया गया। संगठन ने याद दिलाया कि जुलाई 2021 में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) द्वारा गैस रिसाव मामले में उक्त कंपनी पर 10 करोड़ रुपये का पर्यावरणीय जुर्माना लगाया गया था; अतः भूजल, मिट्टी और हवा की सुरक्षा हेतु उठाए गए कदमों की वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जाए और कंपनी के सीएसआर फंड का स्वतंत्र सामाजिक अंकेक्षण कराया जाए।
इसके अतिरिक्त, तिगरी कार्तिक पूर्णिमा मेले में बीते दस वर्षों के अस्थायी सड़क व शौचालय निर्माण ठेकों की पारदर्शी पड़ताल, सेक्टर चार में ठेकेदार को आवंटित स्थान का आवंटन रद्द कर उसे साधु-संतों व अन्न क्षेत्रों को सौंपने, मेले से पूर्व मुख्य व संपर्क मार्गों की मरम्मत कराने तथा प्रदूषण की नियमित निगरानी की मांग प्रमुखता से रखी गई।

संगठन ने चेतावनी दी कि यदि ज्ञापन में उल्लिखित बिंदुओं पर शीघ्र पारदर्शी कदम नहीं उठाए गए, तो किसान यूनियन आंदोलन को और उग्र रूप देगी@ब्यूरो/INN
