राज्यसभा में वंदे मातरम पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू पर तीखा हमला बोला. शाह ने कहा, ‘नेहरू जी ने वंदे मातरम के दो टुकड़े किए. तुष्टिकरण के लिए वंदे मातरम का विरोध किया गया.’ उन्होंने आगे कहा कि जब वंदे मातरम के 100 साल पूरे होने पर देश जश्न मनाता, तब देश को आपातकाल में डाल दिया गया. अमित शाह की इस टिप्पणी पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी और सदन में हंगामा हुआ.
गृहमंत्री ने कहा, ‘गुलामी के कालखंड में वंदे मातरम् गीत ने घनघोर अंधेरे के बीच लोगों के मन में आजादी के खिलाफ लड़ने का जोश जगाया. जब वंदे मातरम 100 साल का हुआ, पूरे देश को बंदी बना दिया गया. जब 150 साल पर कल सदन में चर्चा शुरू हुई, गांधी परिवार के सदस्य नदारद थे. वंदे मातरम का विरोध नेहरू से लेकर आज तक कांग्रेस नेतृत्व के खून में है. कांग्रेस पार्टी की एक नेत्री ने लोकसभा में कहा कि वंदे मातरम पर अभी चर्चा की कोई जरूरत नहीं है.
गृहमंत्री अमित शाह ने कहा- ‘वंदे मातरम सिर्फ बंगाल तक या देश तक सीमित नहीं रहा. दुनिया भर में जहां तक आजादी के दीवाने थे, उन्होंने इसका गुणगान किया. जब सरहद पर एक जवान अपने प्राण त्यागता है, तो उसकी जुबान पर वंदे मातरम् होता है.
अमित शाह ने कहा- ‘7 नवंबर, 1875 को बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय जी की वंदे मातरम् रचना पहली बार सार्वजनिक हुई थी. शुरुआत में इसे एक उत्कृष्ट साहित्यिक कृति माना गया, लेकिन जल्द ही यह गीत देशभक्ति, त्याग और राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक बन गया, जिसने आज़ादी के आंदोलन का मार्ग प्रशस्त किया. अमित शाह ने कहा कि वंदे मातरम सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा है, जिसने लाखों लोगों को प्रेरित किया.’
अमित शाह ने कहा कि भारत की सीमाएं अधिनियम से नहीं, बल्कि संस्कृति से तय हुई हैं. ‘सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को लेकर जागरूक करने का काम बंकिमचंद्र ने किया. जब अंग्रेजों ने प्रतिबंध लगाया, तब बंकिम बाबू ने लिखा कि मेरे सारे साहित्य को गंगा में बहा दो, लेकिन वंदे मातरम जन-जन का गान होगा.’
