बिहार सरकार ने राज्य की पशुपालन व्यवस्था और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। इस योजना के तहत राज्य के सभी 38 जिलों में ‘आदर्श गौशाला’ स्थापित की जाएंगी।
मुख्य घोषणा और उद्देश्य
बिहार के पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग ने पटना में आयोजित एक समीक्षा बैठक के दौरान इन गौशालाओं के सुदृढ़ीकरण और विस्तार की योजना साझा की।
- उद्देश्य: गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाना, आवारा पशुओं की समस्या का समाधान करना और जैविक खेती को बढ़ावा देना।
- मॉडल: इन गौशालाओं को केवल आश्रय स्थल नहीं, बल्कि व्यावसायिक और उत्पादक केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।
योजना की प्रमुख विशेषताएं
- आधुनिक बुनियादी ढांचा: प्रत्येक आदर्श गौशाला में पशुओं के लिए आधुनिक शेड, स्वच्छ पेयजल, हरा चारा उत्पादन (साइलेज) और पशु चिकित्सा की उन्नत सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
- इको-टूरिज्म: इन केंद्रों को ‘इको-टूरिज्म’ स्थल के रूप में भी विकसित किया जाएगा, ताकि लोग गौ-पालन की भारतीय परंपरा और आधुनिक तकनीक से परिचित हो सकें।
- आय के स्रोत: गौशालाओं को आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाने के लिए वहां बायोगैस प्लांट और जैविक खाद निर्माण इकाइयां लगाई जाएंगी।
- सब्सिडी और प्रोत्साहन: सरकार ‘देशी गौपालन प्रोत्साहन योजना 2025-26’ के तहत डेयरी विकास के लिए 75% तक की सब्सिडी भी प्रदान कर रही है, जिससे गौशालाओं के प्रबंधन में मदद मिलेगी।
आवारा पशुओं की समस्या पर प्रहार
सुप्रीम कोर्ट द्वारा आवारा पशुओं और दुर्घटनाओं पर जताई गई चिंता के आलोक में, बिहार सरकार इन गौशालाओं के माध्यम से दूध न देने वाली गायों और छोड़े गए बैलों के सुरक्षित रखरखाव की पुख्ता व्यवस्था कर रही है
