अमरोहा। अमरोहा–गजरौला क्षेत्र में सायनिक कारखानों से निकल रहे ज़हरीले रासायनिक उत्सर्जन के विरोध में शहबाजपुर डोर गांव में किसानों का धरना रविवार को आठवें दिन भी जारी रहा। कड़ाके की ठंड के बावजूद किसान पूरी मुस्तैदी से आंदोलन पर डटे हुए हैं।
धरने को संबोधित करते हुए भारतीय किसान यूनियन (संयुक्त मोर्चा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश चौधरी ने प्रसिद्ध शायर अदम गोंडवी की पंक्तियाँ उद्धृत करते हुए कहा—
“तुम्हारी फाइलों में गांव का मौसम गुलाबी है,
मगर ये आंकड़े झूठे हैं, ये दावा किताबी है।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदूषित भूजल की जांच रिपोर्ट आने और दोषियों पर कार्रवाई होने तक धरना समाप्त नहीं किया जाएगा।

हवा और पानी दोनों ज़हरीले, हालात और बिगड़ने की आशंका
नरेश चौधरी ने कहा कि दिसंबर के शेष दिनों में भी प्रदूषण की स्थिति जस की तस बनी हुई है और हालात और अधिक गंभीर हो सकते हैं। बीते आठ दिनों से क्षेत्र की हवा ज़हरीली बनी हुई है। स्मॉग और नमी के कारण प्रदूषक वातावरण में नीचे ही ठहरे हुए हैं, जिससे रासायनिक प्रतिक्रियाओं के कारण कई तरह की विषैली गैसें बन रही हैं।
इसका असर नाईपुरा, शहबाजपुर डोर, रसूलपुर, फाजलपुर गोसाईं, तिगरिया भूड़ और गंगेश्वरी क्षेत्र में साफ़ देखा जा रहा है। घने कोहरे, धुंध और प्रदूषित भूजल के कारण आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है।
भूजल बना ‘धीमा ज़हर’, नाइट्रेट स्तर खतरनाक
किसान नेता ने चेतावनी दी कि गजरौला और गंगेश्वरी क्षेत्र का भूजल ‘धीमा ज़हर’ बन चुका है। भूजल में नाइट्रेट की मात्रा खतरनाक स्तर तक पहुंच गई है, जिससे पीने का पानी गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर रहा है। उन्होंने कहा कि सेंट्रल ग्राउंड वॉटर बोर्ड (CGWB) से तत्काल जांच कराना आवश्यक है, लेकिन हैरानी की बात है कि अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

विकास के नाम पर प्रकृति का दोहन
नरेश चौधरी ने कहा कि क्षेत्र में राजनेताओं, नौकरशाहों और कारोबारी हितों के अपवित्र गठजोड़ के कारण जल, जंगल, ज़मीन और नदियों का अंधाधुंध दोहन किया गया है। तथाकथित विकास मॉडल से मुनाफा तो कुछ लोगों को मिला, लेकिन आम लोग निर्धन और बीमार होते चले गए।उन्होंने कहा कि “हमें अर्थशास्त्रियों से ज्यादा आज पर्यावरण के बेहतर प्रबंधकों की जरूरत है।”
नाइट्रेट प्रदूषण से स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार नाइट्रेट प्रदूषण कृषि उर्वरकों, पशु अपशिष्ट और औद्योगिक कचरे से भूजल में प्रवेश करता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक पीने के पानी में नाइट्रेट की सुरक्षित सीमा 10 मिलीग्राम प्रति लीटर है।
मुख्य स्वास्थ्य दुष्प्रभाव:
शिशुओं में ‘ब्लू बेबी सिंड्रोम’ (मेथेमोग्लोबिनेमिया)
कोलोरेक्टल, पेट और प्रोस्टेट कैंसर का बढ़ा खतरा
गर्भवती महिलाओं में गर्भपात व जन्म दोष की आशंका
थायरॉइड रोग, उच्च रक्तचाप और श्वसन समस्याएं
धरने में ये किसान नेता रहे मौजूद
धरने में अरुण सिद्धू, चंद्रपाल सिंह, दलजीत सिंह, तेजपाल सिंह, जगदेव सिंह, तस्लीम चौधरी, शानू चौधरी, अभिषेक सिरोही, जर्रार चौधरी, अमन चौधरी, उस्मान चौधरी, मलखान सिंह, अंसार चौधरी, सलमान चौधरी और जीशान चौधरी सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।
