उत्तर प्रदेश के चंदौली से समाजवादी पार्टी के सांसद वीरेंद्र सिंह द्वारा भगवान राम और माता सीता पर दिया गया बयान जनवरी 2026 में एक बड़े राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गया है।
सांसद का मुख्य बयान: वीरेंद्र सिंह ने भगवान राम को ‘समाजवादी’ विचारधारा का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि जब प्रभु राम वनवासी थे, तब उनके विचार और कार्य समाजवादी मूल्यों से प्रेरित थे।
माता सीता और ‘चुगली’ का आरोप: सांसद ने भाजपा पर सीधा हमला करते हुए दावा किया कि जब भगवान राम रावण का वध कर अयोध्या लौटे और राजा बने, तो भाजपा (जैसे मानसिकता वाले) लोगों ने ही ‘चुगली’ करके माता सीता को घर से निकलवाया और उन्हें दोबारा वनवास दिलवाया।
भाजपा की कड़ी प्रतिक्रिया: उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने इस बयान को ‘बेतुका’ और ‘अमर्यादित’ बताया है। भाजपा ने आरोप लगाया कि सपा सांसद अपनी राजनीति चमकाने के लिए धार्मिक भावनाओं का अपमान कर रहे हैं और यह उनकी वैचारिक गिरावट को दर्शाता है।
बयान का समय और संदर्भ: यह बयान 12 जनवरी 2026 को मीडिया के सामने आया। इससे पहले भी अक्टूबर 2025 में उन्होंने भगवान राम को समाजवादी मूल्यों से जोड़कर विमर्श खड़ा किया था, लेकिन इस बार भाजपा पर लगाए गए सीधे आरोपों ने मामले को तूल दे दिया है।
विपक्ष और गठबंधन पर टिप्पणी: इसी बातचीत के दौरान उन्होंने आगामी चुनावों के लिए विपक्षी गठबंधन की एकता पर भी बल दिया और दावा किया कि NDA का कुनबा उनके बयानों और गठबंधन की सक्रियता से घबराया हुआ है।
