सुप्रीम कोर्ट ने 12 जनवरी, 2026 को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और अन्य चुनाव आयुक्तों (ECs) को मिली ‘आजीवन कानूनी सुरक्षा’ (Life-long immunity) को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग से जवाब मांगा है।
चुनौती का आधार: याचिका में ‘मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यालय की अवधि) अधिनियम, 2023’ की धारा 16 को चुनौती दी गई है। यह धारा चुनाव आयुक्तों को उनके आधिकारिक कर्तव्यों के दौरान किए गए किसी भी कार्य या दिए गए बयान के लिए किसी भी दीवानी (civil) या आपराधिक (criminal) कार्यवाही से पूर्ण और आजीवन सुरक्षा प्रदान करती है।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी: भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि वे इस मामले की जांच करना चाहेंगे। अदालत ने केंद्र और चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर 4 हफ्ते के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
याचिकाकर्ता के तर्क: गैर-सरकारी संगठन (NGO) ‘लोक प्रहरी’ की ओर से दायर इस याचिका में तर्क दिया गया है कि ऐसी अभूतपूर्व सुरक्षा संविधान निर्माताओं ने जजों या अन्य उच्च पदस्थ अधिकारियों को भी नहीं दी थी। याचिका में कहा गया है कि यह प्रावधान जवाबदेही के सिद्धांत और कानून के शासन का उल्लंघन करता है।
कानून का संदर्भ: केंद्र सरकार ने दिसंबर 2023 में यह कानून पारित किया था, जिसने 1991 के पुराने कानून की जगह ली थी। इस कानून के तहत यह सुनिश्चित किया गया है कि किसी भी अदालत में चुनाव आयुक्तों के खिलाफ उनके आधिकारिक कार्यों को लेकर कोई मामला नहीं चलाया जा सकता।
