उत्तर प्रदेश के संभल में हुई हिंसा के मामले में अदालत के आदेश के बाद बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। चंदौसी के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) विभांशु सुधीर ने तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी और इंस्पेक्टर अनुज तोमर सहित 12 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। यह आदेश हिंसा में घायल युवक के पिता यामीन द्वारा दायर याचिका पर पारित किया गया है।
अदालत के आदेश के बावजूद संभल के एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने मौखिक रूप से स्पष्ट किया है कि एएसपी अनुज चौधरी और इंस्पेक्टर अनुज तोमर समेत संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ फिलहाल एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी। एसपी ने बताया कि इस आदेश को चुनौती देते हुए अदालत में अपील दाखिल की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि संभल हिंसा प्रकरण की न्यायिक जांच पहले ही पूरी हो चुकी है और जिन पुलिसकर्मियों के खिलाफ आदेश जारी हुआ है, उनकी जांच भी संपन्न हो चुकी है।
जांच और न्यायिक रिपोर्ट की स्थिति (2026 अपडेट)
- एसपी का बयान दर्ज: 13 जनवरी 2026 को संभल के एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने चंदौसी जिला अदालत में अपना बयान दर्ज कराया। उनसे जामा मस्जिद सर्वे हिंसा से जुड़े मामले में लगभग 6 घंटे तक 140 से अधिक सवाल पूछे गए।
- न्यायिक आयोग की रिपोर्ट: अगस्त 2025 में तीन सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को 450 पन्नों की रिपोर्ट सौंपी थी। इस रिपोर्ट में दंगों की साजिश, बाहरी उपद्रवियों की भूमिका और संभल के जनसांख्यिकीय बदलाव जैसे गंभीर मुद्दों का उल्लेख किया गया है।
- सुप्रीम कोर्ट से राहत: अक्टूबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने इस हिंसा के कुछ मुख्य आरोपियों को जमानत दे दी थी, क्योंकि पुलिस द्वारा चार्जशीट पहले ही दाखिल की जा चुकी थी।
ASP अनुज चौधरी का तबादला
घटना के समय CO रहे अनुज चौधरी को प्रमोशन के बाद सितंबर 2025 में फिरोजाबाद (ASP ग्रामीण) के पद पर तैनात किया गया था। अब कोर्ट के इस नए आदेश के बाद उन पर विभागीय और कानूनी शिकंजा कस सकता है।
