अमरोहा।उत्तर प्रदेश का अमरोहा जिला इन दिनों गंभीर स्वास्थ्य संकट की चपेट में है। एक ओर रासायनिक कारखानों से निकल रहे जहरीले अपशिष्ट ने भूजल को विषाक्त कर दिया है, जिससे ग्रामीण इलाकों में लोग गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं और किसान पिछले 26 दिनों से धरने पर बैठे हैं। दूसरी ओर फास्ट-फूड और जंक-फूड की बढ़ती लत अब युवाओं की जान ले रही है। बीते कुछ ही हफ्तों में फास्ट-फूड से जुड़ी तीन मौतों ने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया है।
ताजा मामला डिडौली कोतवाली क्षेत्र के जोया कस्बे का है। यहां निवासी अकरम की पत्नी, उझारी निवासी 20 वर्षीय शिफा की बुधवार सुबह करीब 11 बजे दिल्ली के एम्स अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। अकरम दिल्ली में सिलाई का कार्य करते हैं। परिजनों के अनुसार शिफा फास्ट-फूड की अत्यधिक शौकीन थी और मैगी, चाऊमीन, पिज्जा, बर्गर और मोमोज जैसे जंक-फूड का लगातार सेवन करती थी, जबकि घर का भोजन बेहद कम लेती थी।
परिजनों का कहना है कि फास्ट-फूड के अत्यधिक सेवन से शिफा के पैनक्रियाज में गंभीर संक्रमण हो गया, जिसका असर धीरे-धीरे उसके मस्तिष्क पर भी पड़ने लगा। 7 जनवरी को पेट में तेज दर्द के बाद उसे स्थानीय निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालत बिगड़ने पर चिकित्सकों ने उसे दिल्ली एम्स रेफर किया, जहां कई दिनों तक चले इलाज के बावजूद उसकी जान नहीं बच सकी।
चौंकाने वाली बात यह है कि यह कोई अकेला मामला नहीं है। इससे पहले 22 दिसंबर 2025 को अमरोहा शहर के मोहल्ला अफगानान निवासी मंसूर खान की 16 वर्षीय बेटी आहना की भी एम्स में मौत हो चुकी है। परिजनों ने दावा किया था कि फास्ट-फूड के अत्यधिक सेवन से उसकी आंतों में संक्रमण और चिपकने की समस्या पैदा हो गई थी। वहीं 29 दिसंबर 2025 को गजरौला-चांदपुर हाईवे स्थित चुचैला कलां की रहने वाली, नीट की तैयारी कर रही होनहार छात्रा इलमा की राम मनोहर लोहिया अस्पताल में मौत हो गई थी। अभिभावकों का कहना था कि इलमा पढ़ाई के दौरान भी फास्ट-फूड अपने साथ रखती थी।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अत्यधिक प्रोसेस्ड और जंक-फूड के सेवन से शरीर में पोषण की भारी कमी, पाचन तंत्र की गड़बड़ी, संक्रमण और जानलेवा जटिलताएं पैदा हो सकती हैं। अमरोहा में लगातार सामने आ रही इन मौतों ने फास्ट-फूड के खतरों को एक बार फिर उजागर कर दिया है।
उधर, जिले में रासायनिक प्रदूषण से फैल रहे जल संकट को लेकर भी हालात चिंताजनक बने हुए हैं। दूषित भूजल से बीमारियों का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है, जबकि किसान और ग्रामीण प्रदूषण के खिलाफ लगातार धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रशासन द्वारा गठित जांच समितियां अपनी रिपोर्ट का इंतजार कर रही हैं, लेकिन जमीनी हालात में अब तक कोई ठोस राहत नजर नहीं आ रही है।
इस तरह अमरोहा में एक तरफ जहरीला पानी और दूसरी तरफ अस्वस्थ खान-पान की आदतें लोगों की सेहत पर भारी पड़ रही हैं। जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण दोनों मोर्चों पर प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं। लोग अब साफ पानी, फास्ट-फूड पर सख्त नियंत्रण और जनस्वास्थ्य को लेकर ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
