गजरौला। अमरोहा जिले के गजरौला क्षेत्र के नाईपुरा गांव में भूजल को ज़हरीला बना रहे रासायनिक कारखानों के खिलाफ भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) संयुक्त मोर्चा के तत्वावधान में चल रहा बेमियादी धरना शुक्रवार को 27वें दिन भी जारी रहा। लगातार बढ़ते प्रदूषण और सरकारी उदासीनता के खिलाफ किसानों का आक्रोश अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है।

शुक्रवार को मंडी धनौरा के नायब तहसीलदार योगेश कुमार राजस्व कर्मियों के साथ धरना स्थल पर पहुंचे। वहीं उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी के नेतृत्व में चिकित्सकों की टीम ने शहबाजपुर डोर पहुंचकर ग्रामीणों के स्वास्थ्य हालात का जायजा लिया। बावजूद इसके किसानों का कहना है कि अब तक की कार्रवाई केवल “औपचारिक निरीक्षण” तक सीमित रही है, ज़मीन पर कोई ठोस समाधान नहीं दिख रहा।

किसान संगठनों ने प्रदूषण फैलाने वाले कारखानेदारों के साथ-साथ उन्हें राजनीतिक संरक्षण देने वाले नेताओं की भी जवाबदेही तय करने की मांग की। आरोप लगाया गया कि रासायनिक कारखाने भूजल को ज़हरीला बनाकर ग्रामीणों से उनका जल, जंगल, जमीन और स्वास्थ्य छीन रहे हैं। किसानों का दावा है कि भारी राजनीतिक चंदे के बदले कारखानेदारों को खुली छूट दी जा रही है।

विशेषज्ञों और चिकित्सकों की राय हालात को और भयावह बताती है। दूषित पानी और हवा के कारण क्षेत्र में श्वसन रोग, हृदय रोग, एलर्जी, अल्जाइमर और पार्किंसंस जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है। वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. गौतम लंबरदार के अनुसार प्रदूषण का सबसे घातक असर गर्भस्थ शिशुओं पर पड़ रहा है। पीएम-2.5 जैसे सूक्ष्म कण प्लेसेंटा तक पहुंचकर नवजात के वजन को कम कर रहे हैं, अंगों के विकास को बाधित कर रहे हैं और भविष्य में गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ा रहे हैं। नाईपुरा क्षेत्र में प्रदूषण का स्तर लगातार सुरक्षित मानकों से कई गुना अधिक दर्ज किया जा रहा है।

किसानों ने यह भी सवाल उठाया कि जिस क्षेत्र में रासायनिक कारखानों को रोज़गार का जरिया बताया गया था, वहां आज बेरोज़गारी चरम पर है। आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया कि दिसंबर माह में बेरोज़गारी दर करीब 4.8 प्रतिशत रही। दूसरी ओर, ग्रामीण इलाकों में भूजल ही मुख्य जल स्रोत है, लेकिन करीब 90 प्रतिशत सतही जल पहले ही प्रदूषित हो चुका है। सरकार के अपने आंकड़े बताते हैं कि देश में आज भी 78 प्रतिशत ग्रामीण और 59 प्रतिशत शहरी घरों तक स्वच्छ पेयजल नहीं पहुंच पा रहा।

यह मुद्दा सांसद निधि (एमपीलैड्स) फंड की पारदर्शिता से भी जुड़ गया है। किसानों का आरोप है कि न तो परियोजनाओं की कोई सार्वजनिक सूची उपलब्ध है और न ही प्रगति रिपोर्ट। ट्रांसपेरेंसी पोर्टल बंद होने से जनता के सवाल दबाने की कोशिश की जा रही है।

किसान संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो गजरौला भी उन इलाकों की सूची में शामिल हो जाएगा, जहां दूषित पानी ने जानलेवा रूप ले लिया। उनका साफ कहना है कि जब तक ‘जमीन के ऊपर’ की स्वच्छता को ‘जमीन के नीचे’ के जल संरक्षण से नहीं जोड़ा जाएगा, तब तक विकास केवल एक छलावा बना रहेगा।

धरना स्थल पर भाकियू संयुक्त मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश चौधरी, प्रमुख राष्ट्रीय सचिव अरुण सिद्धू, प्रदेशाध्यक्ष राम कृष्णा चौहान, अमरजीत देओल, अहसान अली, शाने आलम, अभिषेक भुल्लर, समीर चौधरी, आज़म चौधरी, आसिफ चौधरी, इरशाद गुजर, हैदर चौधरी, राम सरण सिंह, ओम प्रकाश, रामप्रसाद, डालू सिंह, श्याम सिंह, रामचंद्र सिंह, मोहम्मद अली, ध्यान सिंह, विजय सिंह, नियामत चौधरी, विरासत वसीयत, होमपाल सिंह, रघुवीर सिंह सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।
