गजरौला। जिले के गजरौला में लंबे समय से चल रहे किसान आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती मिलती दिख रही है। उत्तराखंड तराई क्षेत्र स्थित फार्म हाउस जाते समय जालंधर (पंजाब) के वरिष्ठ किसान नेता बलकार सिंह और दलजीत सिंह गजरौला पहुंचे, जहां उन्होंने प्रदूषण के खिलाफ चल रहे किसान धरना स्थल पर पहुंचकर किसानों के संघर्ष के प्रति एकजुटता जताई।
धरना स्थल पर पहुंचने के बाद दोनों किसान नेताओं ने भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) संयुक्त मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश चौधरी तथा अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष एहसान अली से मुलाकात की और आंदोलन की अब तक की स्थिति, प्रशासनिक कार्रवाई और क्षेत्र में व्याप्त समस्याओं की विस्तृत जानकारी प्राप्त की।
किसान नेताओं को बताया गया कि गजरौला क्षेत्र में स्थित रासायनिक कारखानों से निकलने वाले अपशिष्ट के कारण भूजल बुरी तरह प्रदूषित हो चुका है। स्थानीय ग्रामीणों और किसानों को पीने के पानी से लेकर सिंचाई तक में गंभीर संकट का सामना करना पड़ रहा है। इसी समस्या के स्थायी समाधान की मांग को लेकर भाकियू संयुक्त मोर्चा के नेतृत्व में यह धरना लंबे समय से जारी है।
पंजाब से आए किसान नेताओं ने धरना स्थल पर मौजूद किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा किसी एक क्षेत्र का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह पूरे देश के किसानों और आम नागरिकों की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि जल, जंगल और जमीन सुरक्षित नहीं रहेंगे तो आने वाली पीढ़ियों का भविष्य खतरे में पड़ जाएगा।
उन्होंने गजरौला में चल रहे इस आंदोलन को पूरा समर्थन देने की घोषणा करते हुए कहा कि पंजाब के किसान भी इस संघर्ष में कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। साथ ही उन्होंने मांग की कि प्रशासन और सरकार इस गंभीर विषय को प्राथमिकता पर लेते हुए प्रदूषण फैलाने वाले कारखानों पर सख्त कार्रवाई करे और प्रभावित क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल की तत्काल व्यवस्था सुनिश्चित करे।
धरना स्थल पर पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों की एकजुटता से आंदोलन को नई ऊर्जा मिली है। किसान नेताओं का मानना है कि जब तक समस्या का ठोस और स्थायी समाधान नहीं होता, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।
