अमरोहा।अमरोहा जिले के गजरौला औद्योगिक क्षेत्र में रासायनिक कारखानों से निकल रहे जहरीले अपशिष्ट के विरोध में किसानों का आक्रोश लगातार तेज होता जा रहा है। भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) संयुक्त मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश चौधरी के नेतृत्व में शहबाजपुर डोर गांव में बीते एक महीने से अधिक समय से बेमियादी धरना जारी है। बारिश, बिजली की गर्जना और कड़ाके की ठंड के बावजूद किसान शुक्रवार को बसंत पंचमी पर्व के दिन भी अलाव जलाकर धरना स्थल पर डटे रहे, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
धरना स्थल पर विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधि किसानों के समर्थन में पहुंचे। मीडिया में मामला उठने के बाद अमृतसर (पंजाब) से पहुंचे डॉ. राधेश्याम, समाजवादी पार्टी महिला प्रकोष्ठ की प्रदेश उपाध्यक्ष कुंतेश सैनी, बीके रीता दीदी समेत अन्य वक्ताओं ने आरोप लगाया कि गजरौला औद्योगिक क्षेत्र की फैक्टरियां लगातार भूजल और मिट्टी को जहरीला बना रही हैं। नाईपुरा सहित आसपास के गांवों में रहस्यमयी बीमारियों, कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के मामले बढ़ रहे हैं, वहीं आम सहित अन्य फसलों का चक्र भी बिगड़ गया है। स्थानीय ग्रामीण दूषित पानी पीने को मजबूर हैं, जिससे स्वास्थ्य संकट लगातार गहराता जा रहा है।

भाकियू संयुक्त मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश चौधरी ने कहा कि सरकार की नीतियां बड़े कारखानेदारों और अरबपतियों के पक्ष में हैं, जिससे उनकी संपत्ति तेजी से बढ़ रही है, जबकि आम किसान और ग्रामीण प्रदूषण की मार झेलने को मजबूर हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले पांच वर्षों में सुपर-रिच कारखानेदारों की संपत्ति कई गुना बढ़ी है, लेकिन सबसे कमजोर वर्ग की स्थिति और खराब हुई है। प्रदूषण नियंत्रण कानूनों और पर्यावरणीय नियमों को प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया जा रहा, जिससे लोकतांत्रिक अधिकार खतरे में पड़ रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मीडिया और सोशल प्लेटफॉर्म पर भी बड़े औद्योगिक घरानों का प्रभाव बढ़ता जा रहा है, जिससे आम लोगों की आवाज दबाई जा रही है।
किसानों ने आरोप लगाया कि कारखानेदारों द्वारा सीएसआर फंड के तहत नियमानुसार दो प्रतिशत राशि शाहपुरा गांव के विकास पर खर्च नहीं की गई। इसके उलट जहरीले अपशिष्ट के कारण ग्रामीणों की जिंदगी तबाह हो रही है। किसानों ने आर्थिक असमानता का मुद्दा उठाते हुए कहा कि एक जनसंपर्क अधिकारी की चार घंटे की कमाई स्थानीय मजदूर की साल भर की कमाई से अधिक है।

भाकियू के राष्ट्रीय प्रमुख सचिव अरुण सिद्धू ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने प्रभावित ग्रामीणों की स्वास्थ्य जांच, न्यायसंगत मुआवजा और दूषित पेयजल की समस्या का समाधान नहीं किया तो हालात और गंभीर हो सकते हैं। किसानों का कहना है कि यह आंदोलन अब केवल पानी और फसलों की रक्षा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह बढ़ती आर्थिक असमानता, पर्यावरण संकट और लोकतांत्रिक अधिकारों की लड़ाई बन चुका है। किसानों ने मांग की कि प्रदूषण फैलाने वाली फैक्टरियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और प्रभावित लोगों को तत्काल राहत प्रदान की जाए।
धरना स्थल पर वयोवृद्ध किसान नेता चौधरी चरणसिंह, प्रदेशाध्यक्ष रामकृष्ण चौहान, ओम प्रकाश, समरपाल सैनी, होमपाल सिंह, सुरेश सिंह, विजय सिंह, रामप्रसाद सिंह सहित सैकड़ों किसान मौजूद रहे।
