तेज़ आंधी-बिजली में भी नहीं डिगे हौसले, 35 दिन से बेमियादी धरना जारी
गजरौला (अमरोहा)।“रहिमन पानी राखिए, बिनु पानी सब सून”—यह दोहा आज गजरौला-नाईपुरा के किसानों की पीड़ा और संघर्ष का प्रतीक बन चुका है। जिस पानी से जीवन, खेती और आत्मसम्मान जुड़ा है, उसी पानी को रासायनिक कारखानों ने ज़हर बना दिया है। यही कारण है कि किसान आज सिर्फ पानी नहीं, बल्कि जल-जमीन-जीवन और स्वाभिमान की लड़ाई लड़ रहे हैं।
भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) संयुक्त मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश चौधरी ने शनिवार को शहबाजपुर डोर, एनएच-9 किनारे चल रहे बेमियादी धरने को संबोधित करते हुए कहा कि
“तेज़ बर्फीली हवाओं, आंधी-मेह और कड़कती बिजली के बावजूद किसानों के हौसले नहीं डिगे। क्योंकि यह संघर्ष आजीविका के साथ-साथ आत्मसम्मान और स्वाभिमान बचाने का है।”
उन्होंने कहा कि रासायनिक कारखानों द्वारा भूगर्भ जल को जहरीला किए जाने से किसान की खेती, स्वास्थ्य और भविष्य तीनों खतरे में हैं, लेकिन शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधि आंखें मूंदे बैठे हैं।

महिलाओं की बड़ी भागीदारी, नेताओं की चुप्पी पर फूटा गुस्सा
शनिवार को आसपास के गांवों से ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में भरकर बड़ी संख्या में किसान जत्थेबंदियों के साथ धरना स्थल पहुंचे। आंदोलन में महिलाओं की भागीदारी सबसे अधिक रही। भाकियू संयुक्त मोर्चा के झंडे हाथों में लिए महिलाओं ने सांसद-विधायकों, प्रशासन और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। महिलाओं ने कहा कि
“35 दिन से अधिक समय से किसान बेमियादी धरने पर डटे हैं, लेकिन नेताओं की चुप्पी यह साबित करती है कि चुनावी वादे खोखले थे।”
उन्होंने सवाल उठाया कि वेस्ट यूपी की पुकार लखनऊ और दिल्ली तक क्यों नहीं पहुंच रही, जबकि किसान केंद्रीय हस्तक्षेप, ग्रीन फंड, प्रदूषण रोकथाम और सीएसआर फंड से समाधान की मांग कर रहे हैं।

नल से निकल रहा ज़हर, फसलें बर्बाद, सेहत पर संकट
अमरोहा जिले के गजरौला क्षेत्र, विशेषकर नाईपुरा गांव, में हालात भयावह हैं। किसानों का कहना है कि औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला प्रदूषित अपशिष्ट भूगर्भ जल को जहरीला बना चुका है। नल चलाते ही बदबूदार, जहरीला पानी निकलता है, जिससे फसलें नष्ट हो रही हैं और ग्रामीणों की सेहत पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
किसानों का आरोप है कि स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने इस सबसे ज्वलंत मुद्दे की लगातार उपेक्षा की है। विकास के नाम पर चौड़ी सड़कें और ऊंची चिमनियां तो खड़ी हो गईं, लेकिन बुनियादी जरूरत-स्वच्छ पानी-आज भी दूर है।

चेतावनी: जल्द समाधान नहीं हुआ तो संघर्ष होगा तेज
किसानों ने साफ कहा कि यदि शीघ्र ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन और उग्र होगा। गजरौला-नाईपुरा का यह धरना राज्य और केंद्र सरकार की नीतिगत विफलता को उजागर कर रहा है।
धरने में ये रहे मौजूद
इस अवसर पर भाकियू संयुक्त मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश चौधरी के साथ प्रदेश अध्यक्ष रामकृष्ण चौहान, अल्पसंख्यक मोर्चा प्रभारी एवं मंडलाध्यक्ष एहसान अली, अमरजीत देओल, गंगाराम सिंह, होमपाल सिंह, आज़म चौधरी, दिनेश चौहान, इरशाद चौधरी, हनीफ गुर्जर, सैंपल सैनी, विजय सिंह, ओमप्रकाश, रामप्रसाद, प्रेमवती, नाजमा, संतोष देवी, राजवती, नीतू देवी, गुड्डी देवी सहित सैकड़ों किसान और महिलाएं मौजूद रहीं।
