लखनऊ। प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर है। अब आधार कार्ड बनवाने या उसमें संशोधन कराने के लिए शहरों में स्थित बैंकों और डाकघरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। राज्य सरकार ने ग्राम पंचायत स्तर पर ही आधार सेवाएं उपलब्ध कराने का फैसला लिया है, जिससे ग्रामीणों को लंबी कतारों और समय की बर्बादी से निजात मिलेगी।
पंचायती राज विभाग द्वारा शुरू की गई इस पहल के तहत गांवों में ही आधार नामांकन और संशोधन की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। इससे महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को विशेष रूप से लाभ मिलेगा, जिन्हें पहले छोटी-छोटी त्रुटियों के सुधार के लिए भी दूर-दराज के कार्यालयों में जाना पड़ता था।
लखनऊ से हुई शुरुआत, पूरे प्रदेश में होगा विस्तार
इस योजना की शुरुआत राजधानी लखनऊ से हो चुकी है। सरोजनीनगर ब्लॉक की ग्राम पंचायत भटगांवा पांडेय और चिनहट ब्लॉक की ग्राम पंचायत सैरपुर में आधार केंद्र स्थापित कर दिए गए हैं। अब इन गांवों के ग्रामीण अपने ही क्षेत्र में आधार कार्ड बनवाने और उसमें सुधार कराने की सुविधा का लाभ उठा सकते हैं।
पंचायती राज विभाग ने इस योजना को पूरे प्रदेश में लागू करने के लिए रोडमैप तैयार कर लिया है। पहले चरण में करीब 1,000 ग्राम पंचायतों में यह सेवा शुरू की जाएगी, जिसके बाद इसे प्रदेश की 57,694 ग्राम पंचायतों तक विस्तारित किया जाएगा।
पंचायत सहायकों की अहम भूमिका
गांवों में आधार सेवाओं को सुचारू रूप से संचालित करने की जिम्मेदारी पंचायत सहायकों को सौंपी गई है। अब तक 800 से अधिक पंचायत सहायकों को डिजिटल उपकरणों और आवश्यक प्रशिक्षण के साथ तैयार किया जा चुका है। ये सहायक ग्रामीणों को आधार से जुड़ी सभी प्रक्रियाओं में मदद करेंगे, ताकि सेवाएं आसान और पारदर्शी बन सकें।
ग्रामीणों को होंगे कई फायदे
इस पहल से ग्रामीणों को न केवल समय और पैसे की बचत होगी, बल्कि सरकारी योजनाओं का लाभ भी सीधे गांव में ही मिल सकेगा। शहर जाने की मजबूरी खत्म होने से ग्रामीण जीवन अधिक सरल और सुविधाजनक बनेगा।
कुल मिलाकर, ग्राम पंचायत स्तर पर आधार सेवाओं की शुरुआत को ग्रामीण सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
