मुरादाबाद। पीतल नगरी मुरादाबाद के लिए एक बार फिर गर्व का क्षण आया है। भारत सरकार ने यहां के प्रतिष्ठित हस्तशिल्पी चिरंजी लाल यादव को देश के प्रतिष्ठित पद्मश्री सम्मान के लिए चयनित किया है। इस घोषणा के साथ ही शहर के कारीगरों और हस्तशिल्प उद्योग से जुड़े लोगों में उत्साह और खुशी का माहौल बन गया।
सम्मान की खबर मिलते ही बड़ी संख्या में हस्तशिल्पी चिरंजी लाल यादव के आवास पर एकत्र हुए और उन्हें शुभकामनाएं दीं। कारीगरों ने इसे केवल एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे मुरादाबाद हस्तशिल्प जगत की जीत बताया।

कोतवाली क्षेत्र में गुरहट्टी निवासी चिरंजीलाल यादव पेशे से हस्तशिल्पी हैं। वो पिछले करीब 40 सालों से पीतल पर दस्तकारी को उकेर कर नायाब हस्तशिल्प उत्पाद बनाते चले आ रहे हैं। उन्होंने सैकड़ों युवाओं को भी शिल्पकारी की कला सिखाई है। ‘पद्मश्री’ मिलने की सूचना से चिरंजीलाल यादव बेहद खुश हैं। वो कहते हैं- मैं तीन साल से आवेदन कर रहा था। मुझे यकीन था कि एक न एक दिन मेरी मेहनत को प्रतिफल अवश्य मिलेगा। आज वो दिन आ गया है। सरकार ने मेरी कला का सम्मान किया है। इसासे मैं बेहद खुश हूं।

इस अवसर पर अखिल भारतीय हस्तशिल्प बोर्ड, वस्त्र मंत्रालय के पूर्व सदस्य आजम अंसारी ने कहा कि यह सम्मान इस बात का स्पष्ट संकेत है कि केंद्र सरकार मुरादाबाद के हस्तशिल्प और यहां की पारंपरिक कला को गंभीरता से देख रही है। उन्होंने कहा कि बीते तीन वर्षों से लगातार मुरादाबाद के कारीगरों को पद्मश्री जैसे राष्ट्रीय सम्मानों से नवाजा जाना इसी विश्वास का परिणाम है।
उन्होंने वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार तथा विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) कार्यालय के प्रति आभार जताते हुए कहा कि मुरादाबाद के हस्तशिल्पी आने वाले वर्षों में भी देश के बड़े सम्मानों के लिए निरंतर प्रयास करते रहेंगे।

आजम अंसारी ने कहा कि मुरादाबाद, जिसे दुनिया भर में ‘ब्रास सिटी’ के नाम से जाना जाता है, यहां के कारीगरों ने अपनी कला, समर्पण और कठिन परिश्रम से वैश्विक पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि मुरादाबाद के हस्तशिल्पियों की लगन और हुनर के कारण ही जनपद बार-बार राष्ट्रीय मंच पर सम्मानित हो रहा है, जो पूरे जिले के लिए गौरव की बात है।

उल्लेखनीय है कि 2024 में दिलशाद हुसैन, 2025 में बाबूराम यादव और अब 2026 में चिरंजी लाल यादव को पद्मश्री सम्मान के लिए चुना गया है। उन्होंने कहा कि जहां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय हस्तशिल्प को कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है, वहीं मुरादाबाद के कारीगर अपनी उत्कृष्ट कलाकृतियों के माध्यम से भारत की सांस्कृतिक पहचान को पूरी दुनिया में मजबूत कर रहे हैं।
