शंकराचार्य विवाद पर कुमार विश्वास का बड़ा बयान
मुरादाबाद। प्रख्यात कवि, विचारक एवं वक्ता डॉ. कुमार विश्वास सोमवार को मशहूर शायर मंसूर उस्मानी के आवास पर पहुंचे। हाल ही में आग लगने की घटना के दौरान शायर मंसूर उस्मानी की पुत्री के असामयिक निधन पर उन्होंने गहरी संवेदना व्यक्त की और शोकाकुल परिवार के दुख में सहभागी बने।

उल्लेखनीय है कि डॉ. कुमार विश्वास महानगर में आयोजित उदीषा साहित्य उत्सव के अंतिम दिन अपनी प्रस्तुति देने आए थे। इसी दौरान उन्होंने प्रशासन से शायर मंसूर उस्मानी से मिलने की इच्छा जताई, जिसके बाद एसपी सिटी स्वयं उन्हें उनके आवास तक लेकर पहुंचे।
इस दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए डॉ. कुमार विश्वास ने शंकराचार्य विवाद को लेकर अपनी अहम प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भारत की संत परंपरा अत्यंत प्राचीन, पूजनीय और आदरणीय है। प्रशासन को संतों एवं धर्माचार्यों से संवाद करते समय मर्यादा, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
डॉ. कुमार विश्वास ने कहा,
“मैं स्वयं एक सामान्य आस्तिक हूं और पूज्य शंकराचार्य जी के प्रति केवल श्रद्धा रखता हूं। यदि किसी भी पक्ष से कोई त्रुटि हुई हो, तो मैं क्षमाप्रार्थी हूं।”

उन्होंने शंकराचार्य जी से भी सात्विक क्रोध त्यागने और सभी पर अपना आशीर्वाद बनाए रखने का आग्रह किया।
भाषा की राजनीति पर भी कुमार विश्वास सख्त
एम.के. स्टालिन के हिंदी विरोधी बयान को बताया क्षोभजनक
डॉ. कुमार विश्वास ने भाषा विवाद पर भी स्पष्ट और सख्त रुख अपनाया। उन्होंने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के हिंदी विरोधी बयानों को क्षोभजनक और दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
उन्होंने कहा कि भाषाएं संवाद का माध्यम होती हैं, विरोध का नहीं। भाषा के नाम पर समाज को बांटना देशहित में नहीं है। भारत की ताकत उसकी विविधता में निहित है।

कुमार विश्वास ने दक्षिण भारतीय भाषाओं और उनकी समृद्ध साहित्यिक परंपरा की खुलकर सराहना करते हुए उत्तर भारत के लोगों से सुब्रमण्यम भारती और तिरुवल्लुवर जैसे महान विद्वानों को पढ़ने की भी अपील की।
उन्होंने कहा कि हिंदी विरोध की राजनीति विभाजनकारी है और इससे राष्ट्रीय एकता को नुकसान पहुंचता है।
