अमरोहा। जिले के गजरौला क्षेत्र में औद्योगिक प्रदूषण और दूषित जल की समस्या को लेकर भारतीय किसान यूनियन (संयुक्त मोर्चा) के बैनर तले चल रहा आंदोलन गुरुवार को 40वें दिन में प्रवेश कर गया। यह धरना नाईपुरा गांव के पास शहबाजपुर डोर, नेशनल हाईवे-9 के किनारे लगातार जारी है, जहां आसपास स्थापित रासायनिक कारखानों से निकलने वाले जहरीले अपशिष्ट ने भूजल को गंभीर रूप से प्रदूषित कर दिया है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र का पानी पीले रंग का हो चुका है और उसमें तीव्र दुर्गंध है। इस दूषित जल के सेवन से लोगों में त्वचा रोग, पेट की बीमारियां और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। हाल ही में बिजनौर जनपद के लुहारपुरा निवासी मजदूर दंपति की संदिग्ध बीमारी से हुई मौत ने आंदोलन को और तेज कर दिया है।

गजरौला में मजदूरी कर रहे नीटू (45) और उनकी पत्नी सपना (39) की पहले पत्नी और फिर पति की मृत्यु ने क्षेत्र में दहशत का माहौल बना दिया। बताया गया कि मेरठ में इलाज के दौरान महज कुछ ही मिनटों के अंतराल में दोनों की जान चली गई, जिसके बाद एक साथ उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई।

धरना स्थल पर किसानों को संबोधित करते हुए भाकियू संयुक्त मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष रामकृष्ण चौहान ने औद्योगिक नीतियों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि विकास के नाम पर अपनाए गए आर्थिक मॉडल ने आम जनता को केवल बीमारियां और मौतें दी हैं, जबकि लाभ केवल बड़े उद्योगों तक सीमित रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जल, जंगल और जमीन का अंधाधुंध दोहन किया जा रहा है और इसके दुष्परिणाम किसानों व मजदूरों को भुगतने पड़ रहे हैं।

वहीं संगठन के अल्पसंख्यक मोर्चा प्रभारी एहसान अली ने कहा कि विकास का आकलन केवल आंकड़ों से नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और आम लोगों के जीवन स्तर को भी उसका आधार बनाया जाना चाहिए। उन्होंने प्रशासन से प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों पर कठोर कार्रवाई की मांग की।

किसान नेताओं ने बताया कि जिलाधिकारी निधि गुप्ता वत्स द्वारा एक सप्ताह में मिट्टी और पानी की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने और आवश्यक कानूनी कार्रवाई के आश्वासन को अभी अधूरा बताया। चेतावनी दी गई कि यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
धरना स्थल पर प्रशासन की निष्क्रियता को लेकर नाराजगी साफ नजर आई। किसानों ने स्पष्ट कहा कि अब चुप्पी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जब तक प्रदूषण से निजात नहीं मिलती, संघर्ष जारी रहेगा।
इस दौरान नाजमा खान, नीतू रानी, संतोष देवी, राजमणि देवी, राजवंती गुड्डी, दयाबती, ओमप्रकाश सिंह, दिलशाद सलमानी, होमपाल सिंह, समरपाल सैनी, अरशद अली, विजय सिंह, मोनू सिंह, फैयूम सलमानी सहित सैकड़ों पुरुष और महिला किसान धरने में मौजूद रहे।
