अमरोहा। उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले में नाईपुरा गांव के भूजल दूषित होने के मुद्दे पर किसानों का आक्रोश लगातार बढ़ रहा है। भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) संयुक्त मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश चौधरी ने शनिवार को मुकारी गांव में ग्रामीणों की समस्याओं से रुबरू होने के लिए आयोजित कार्यक्रम में प्रभारी मंत्री तथा वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री केपी मलिक के समक्ष इस गंभीर समस्या को जोरदार तरीके से उठाया।

31 जनवरी को मुकारी गांव में ग्राम चौपाल के दौरान नरेश चौधरी ने ज़हरीले पानी की बोतलें दिखाते हुए नाईपुरा गांववासियों की पीड़ा को मंत्री के सामने रखा। उन्होंने बताया कि रासायनिक कारखानों से निकलने वाले अपशिष्ट के कारण भूजल पूरी तरह दूषित हो चुका है। हैंडपंप और ट्यूबवेल से निकलने वाला पानी जहरीला हो गया है, जिससे ग्रामीणों में गंभीर बीमारियां फैल रही हैं। कई परिवार प्रभावित हैं और फसलें भी बर्बाद हो रही हैं। चौधरी ने आरोप लगाया कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और प्रशासन की लापरवाही से यह समस्या दिन-ब-दिन विकराल होती जा रही है।

प्रभारी मंत्री केपी मलिक ने इस मुद्दे को गंभीरता से लिया। उन्होंने किसान नेता से पूछा कि भूजल दूषित करने के लिए कौन-कौन से रासायनिक कारखाने जिम्मेदार हैं। मंत्री ने आश्वासन दिया कि दोषी कारखानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने के बाद दोषियों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी और प्रभावित क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था के लिए तत्काल कदम उठाए जाएंगे।

यह घटना शहबाजपुर डोर में चल रहे 43 दिनों से अधिक के बेमियादी धरने के बीच हुई है, जहां किसान प्रदूषण के खिलाफ डटे हुए हैं। नरेश चौधरी ने कहा कि यदि समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकला तो आंदोलन और तेज होगा। ग्रामीणों ने मंत्री से मांग की है कि प्रदूषण रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं और पीड़ितों को तुरंत राहत प्रदान की जाए। इस मुद्दे ने स्थानीय स्तर पर राजनीतिक और सामाजिक बहस छेड़ दी है। प्रशासन का कहना है कि जांच जारी है, लेकिन किसान इसे अपर्याप्त मान रहे हैं।

इस अवसर पर राष्ट्रीय सचिव चंद्रपाल सिंह, प्रदेश अध्यक्ष रामकृष्ण चौहान, अल्पसंख्यक मोर्चा प्रभारी एवं मंडल अध्यक्ष एहसान अली, होमपाल सिंह, विजय सिंह, चंद्रपाल सिंह, भूखन सिंह, रतिराम सिंह, ओम प्रकाश सिंह, राम प्रकाश सिंह समेत सैकड़ों किसान मौजूद रहे।
