अमरोहा। दूषित सतही पानी और सूखते स्रोत, बीमारों से भरे अस्पताल, लेकिन प्रशासन की प्राथमिकता राजनीतिक शोर और अल्पकालिक लाभ ही लगती है।
भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) संयुक्त मोर्चा के बैनर तले गजरौला के शहबाजपुर डोर में नाईपुरा गांव के जहरीले पानी के खिलाफ चल रहा बेमियादी धरना आज 45वें दिन भी जारी है, लेकिन जिला प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई या संवाद की झलक नहीं दिखी है। किसान नेताओं ने इस चुप्पी पर तीखा तंज कसते हुए कहा कि प्रशासन का सबसे बड़ा ‘योगदान’ साल- दर-साल गहरी चिंता जताने का रिकॉर्ड बनाना भर रह गया है।

राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश चौधरी ने आरोप लगाया कि नाईपुरा जैसी जल त्रासदी की ओर प्रशासन की आंखें बंद हैं, जो आत्ममुग्धता के सिवा और कुछ नहीं। उन्होंने कहा, जंगल की पारिस्थितिकी देश की जीडीपी में 7% योगदान देती है, लेकिन सबसे गरीबों की आय का 57% इसी से आता है। फिर भी यहां जैवविविधता तेजी से नष्ट हो रही है। मिट्टी-पानी के जहर से नदियां, जोहड़, तालाब सूख रहे हैं, फसलें बर्बाद हो रही हैं, मवेशी मर रहे हैं और ग्रामीण नई-नई बीमारियों से जूझ रहे हैं।

प्रदेशाध्यक्ष रामकृष्ण चौहान ने वैज्ञानिक चेतावनियों का हवाला देते हुए बताया कि ताजे पानी के 9 में से 6 चक्र अस्थिर हो चुके हैं, जिससे भीषण गर्मी, पानी की कमी और संक्रमण बढ़ रहे हैं। देशभर में जहां हर साल 15 लाख बच्चे जलजनित बीमारियों से मरते हैं, जबकि नाईपुरा में इन तमाम बीमारियों के अलावा कुपोषण और कद में गिरावट राष्ट्रीय औसत से कहीं ज्यादा है। उन्होंने चिकित्सकों के हवाले से बताया कि दूषित सतही पानी और सूखते स्रोतों से अस्पताल भर रहे हैं, लेकिन प्रशासन की प्राथमिकता राजनीतिक शोर और अल्पकालिक लाभ ही लगती है।

अल्पसंख्यक मोर्चा प्रभारी एहसान अली ने सवाल उठाया, क्या मुनाफे की राजनीति में सबसे कमजोर वर्गों को बचाया जा सकता है? प्रशासन गैर-मानव जीवमंडल को पूरी तरह भूल चुका है। स्वच्छ जल इंजीनियरिंग से नहीं, बल्कि स्वस्थ पारिस्थितिकी से आता है, जिस पर जहर का दबाव बढ़ता जा रहा है।

किसान नेताओं का कहना है कि यदि ऐसी त्रासदी साल-दर-साल बढ़ती रही, तो विकास का दावा खोखला साबित होगा। धरना जारी है, किसानों की मांग है,कारखानों पर सख्ती, प्रदूषण नियंत्रण और स्वच्छ पानी की गारंटी। प्रशासन की खामोशी किसानों के धैर्य की परीक्षा ले रही है, लेकिन समाधान की उम्मीद अभी भी बाकी है।

अवसर पर बच्चे बूढ़े और महिलाओं के अलावा विशेष रूप से सोमपाल सिंह, सुरेश चंद्र, ओम प्रकाश सिंह, होमपाल सिंह, समर पाल सिंह,राम प्रसाद सिंह, सिसपाल सिंह, जगन सैनी, रामपाल सैनी, राम चरण सिंह, जसवंत सैनी, विजय सिंह आदि किसान मौजूद रहे।
