पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट से खुद अपनी बात रखने की अनुमति मांगी और कहा कि वह इस मुद्दे को बेहतर तरीके से समझा सकती हैं क्योंकि वह उसी राज्य से आती हैं। इस पर भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि वह वहीं से हैं। ममता ने अदालत को धन्यवाद देते हुए कहा कि अक्सर वकील तब लड़ाई लड़ते हैं जब मामला लगभग खत्म हो चुका होता है और न्याय नहीं मिल पाता। उन्होंने कहा कि न्याय जैसे बंद कमरों के पीछे रो रहा है। उन्होंने बताया कि उन्होंने चुनाव आयोग (ECI) को छह पत्र लिखे, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। ममता ने कहा कि वह कोई बड़ी हस्ती नहीं हैं, बल्कि एक आम इंसान की तरह अपनी बात रख रही हैं और यह लड़ाई किसी पार्टी के लिए नहीं बल्कि जनता के लिए है।
इस पर CJI ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पहले ही एक याचिका दायर की जा चुकी है और देश के अनुभवी वकील जैसे कपिल सिब्बल, गोपाल शंकरनारायणन और श्याम दीवान इस मामले में राज्य का पक्ष रख रहे हैं।
सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी ने रवींद्रनाथ टैगोर का एक उद्धरण भी दिया। इस पर CJI ने कहा कि कई बार नामों की स्पेलिंग अलग-अलग तरीके से लिखी जाती है, जैसे रॉय, दत्ता या गांगुली के नाम अलग-अलग रूप में मिलते हैं। आजकल टैगोर के नाम की स्पेलिंग भी अलग-अलग तरह से लिखी जाती है।
ममता ने अदालत से अनुमति लेकर कुछ बंगाली अखबारों में छपी तस्वीरें दिखाने की बात कही। उन्होंने आरोप लगाया कि नामों में मामूली अंतर को ‘मिसमैच’ बताकर लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि शादी के बाद अगर कोई महिला पति का सरनेम इस्तेमाल करती है, तो उसे भी नाम में गड़बड़ी बताकर हटाया जा रहा है। इसी तरह काम के कारण पता बदलने पर भी नाम हटाए जा रहे हैं। ममता ने इस पूरी प्रक्रिया को ‘डिस्क्रेपेंसी मैपिंग’ बताया।
उन्होंने कहा कि बंगाल के लोग सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले से खुश थे, जिसमें आधार कार्ड, डोमिसाइल सर्टिफिकेट और सरकारी आवास कार्ड को मान्य दस्तावेज माना गया था। लेकिन अब चुनाव से ठीक पहले केवल बंगाल को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जो प्रक्रिया दो साल में पूरी होनी थी, उसे चार महीने में क्यों पूरा किया जा रहा है। साथ ही, फसल कटाई और त्योहारों के समय नोटिस जारी करने पर भी उन्होंने आपत्ति जताई।
CJI ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार उन SDM और क्लास-2 अधिकारियों की सूची दे, जिन्हें चुनाव ड्यूटी के लिए भेजा जा सकता है। उन्होंने कहा कि अगर पर्याप्त अधिकारी उपलब्ध हो जाते हैं, तो माइक्रो ऑब्जर्वर की जरूरत कम हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि एक ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता लेखक को भी नोटिस भेजा गया है, इसलिए इस तरह की घटनाओं पर ध्यान देने की जरूरत है।
सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को ‘व्हाट्सऐप आयोग’ बताते हुए आरोप लगाया कि आयोग के जरिए लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं और बंगाल को निशाना बनाया जा रहा है।
ममता बनर्जी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है। आयोग को सोमवार तक जवाब दाखिल करना होगा। साथ ही, पश्चिम बंगाल सरकार चुनाव ड्यूटी के लिए उपलब्ध क्लास-2 अधिकारियों की सूची कोर्ट में पेश करेगी।
