भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 6 फरवरी 2026 को अपनी मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के परिणामों की घोषणा करते हुए रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखने का निर्णय लिया है।
1. EMI पर कोई राहत क्यों नहीं मिली?
अधिकांश होम लोन एक्सटर्नल बेंचमार्क (EBLR), विशेष रूप से रेपो रेट से जुड़े होते हैं। जब आरबीआई रेपो रेट कम करता है, तो बैंक भी ब्याज दरें घटाते हैं, जिससे EMI कम हो जाती है। चूंकि इस बार दर में कोई बदलाव नहीं हुआ है, इसलिए आपकी मौजूदा EMI स्थिर रहेगी।
2. आरबीआई ने दरें क्यों नहीं घटाईं?
गवर्नर संजय मल्होत्रा ने इसके पीछे कई महत्वपूर्ण कारण बताए हैं:
- सतर्क दृष्टिकोण: वैश्विक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक जोखिमों को देखते हुए आरबीआई ने जल्दबाजी के बजाय स्थिरता को चुना है।
- महंगाई का अनुमान: हालांकि महंगाई कम हुई है, लेकिन आरबीआई ने भविष्य (वित्त वर्ष 2027) के लिए इसे 4% पर रखने का लक्ष्य रखा है, जिसके लिए दरों को अभी स्थिर रखना जरूरी समझा गया।
- पिछली कटौतियां: आरबीआई पहले ही 2025-26 के दौरान कुल 1.25% (125 bps) की कटौती कर चुका है, जिसका असर अभी भी बाजार में फैल रहा है।
3. अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत
दरें न घटाने के बावजूद, आरबीआई ने भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर भरोसा जताया है:
- जीडीपी ग्रोथ: वित्त वर्ष 2025-26 के लिए विकास दर का अनुमान 7.3% से बढ़ाकर 7.4% कर दिया गया है।
- व्यापार समझौते: हाल ही में हुए भारत-यूरोपीय संघ (EU) FTA और भारत-अमेरिका व्यापार समझौतों से निर्यात और आर्थिक गति को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
4. कर्जदारों और जमाकर्ताओं के लिए क्या है?
- नए कर्जदार: यह बैंकों के लोन ऑफर्स की तुलना करने और भविष्य की अनिश्चितता से बचने के लिए फिक्स्ड-रेट विकल्पों पर विचार करने का अच्छा समय है।
- जमाकर्ता (FD): चूंकि दरें स्थिर हैं, इसलिए बैंक एफडी (FD) दरों में भी तत्काल कटौती नहीं करेंगे। विशेषज्ञों ने बेहतर रिटर्न के लिए FD लैडरिंग (अलग-अलग अवधि की कई FD) की सलाह दी है।
