कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कथित तौर पर नागरिकता लिए बिना मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के मामले में अदालत में अपना जवाब दाखिल कर दिया है। यह जवाब राऊज एवेन्यू कोर्ट में दायर रिवीजन पिटीशन पर दिया गया है। इस मामले में वकील विकास त्रिपाठी ने रिवीजन पिटीशन दाखिल की थी।
इससे पहले, बिना नागरिकता हासिल किए वोटर लिस्ट में नाम शामिल कराने के आरोप में सोनिया गांधी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच कराने की मांग वाली याचिका को मजिस्ट्रेट कोर्ट ने सितंबर 2025 में खारिज कर दिया था।
मामला क्या है?
अधिवक्ता विकास त्रिपाठी ने एक रिवीजन पिटीशन दाखिल की है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि सोनिया गांधी को भारतीय नागरिकता 30 अप्रैल 1983 को मिली थी, लेकिन उनका नाम 1980 की मतदाता सूची में पहले से ही दर्ज था। इससे पहले सितंबर 2025 में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने इस शिकायत को खारिज कर दिया था, जिसे अब ऊपरी अदालत में चुनौती दी गई है।
अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 21 फरवरी 2026 को तय की है।
