अमरोहा। अमरोहा जिले के गजरौला क्षेत्र में रासायनिक कारखानों से फैल रहे भूजल प्रदूषण के विरोध में किसानों का आंदोलन अब जनआंदोलन का रूप ले चुका है। शहबाजपुर डोर धरना स्थल पर भारतीय किसान यूनियन (संयुक्त मोर्चा) के नेतृत्व में चल रहा बेमियादी धरना मंगलवार को 52वें दिन में प्रवेश कर गया। नाईपुरा सहित आसपास के दर्जनों गांवों में पीने का पानी पीला, बदबूदार और जहरीले रसायनों से युक्त हो चुका है, जिससे ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

किसानों का कहना है कि प्रदूषित पानी के कारण त्वचा रोग, पेट की बीमारियां और अन्य गंभीर समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार भारत में हर वर्ष दूषित जल के कारण करीब दो लाख लोगों की मौत होती है, जो इस संकट की भयावहता को दर्शाता है।

धरना नहीं, जनजागरण अभियान
भारतीय किसान यूनियन (संयुक्त मोर्चा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश चौधरी के नेतृत्व में किसान विषम परिस्थितियों में भी डटे हुए हैं। आंदोलन केवल धरना स्थल तक सीमित न रहकर गांव-गांव जल चौपाल, स्कूलों में जागरूकता और घर-घर संवाद के जरिए व्यापक जनसमर्थन हासिल कर रहा है। किसानों ने सरकार से तत्काल सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित करने, प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों को बंद करने और भूजल संरक्षण की ठोस नीति लागू करने की मांग की है।

किसानों ने इंडो-ट्रंप समझौते का किया विरोध
मंगलवार को धरना स्थल पर किसानों ने इंडो-ट्रंप समझौते की प्रतियां जलाकर विरोध दर्ज कराया। नरेश चौधरी ने कहा कि यह समझौता खेती और डेयरी उद्योग के लिए घातक है तथा भाजपा के स्वदेशी और आत्मनिर्भरता के दावों के विपरीत है।

‘जय जवान–जय किसान’ से गूंजा हाईवे
धरने को मिल रहे जनसमर्थन के चलते नेशनल हाईवे से गुजर रहे सेना के वाहनों का काफिला भी कुछ देर के लिए रुका। किसानों ने जवानों को दूषित पानी की बोतलें दिखाईं और ‘जय जवान–जय किसान’ के नारों से वातावरण गूंज उठा।

आर्थिक बदहाली पर सरकार से सवाल
नरेश चौधरी ने कहा कि पिछले 55 वर्षों में डीजल की कीमत 55 पैसे से बढ़कर 91 रुपये हो गई, जबकि फसलों के दाम महज 26 गुना बढ़े। इसके विपरीत सरकारी वेतन 350 गुना तक बढ़ चुका है। उन्होंने वर्ष 2022 तक किसान आय दोगुनी करने के वादे को अधूरा करार दिया।
सरकार नहीं चेती तो आंदोलन होगा तेज
अल्पसंख्यक मोर्चा प्रभारी एवं मंडलाध्यक्ष एहसान अली ने कहा कि यह आंदोलन केवल स्थानीय प्रदूषण का नहीं, बल्कि असंवेदनशील विकास, औद्योगिक लापरवाही और किसान-विरोधी नीतियों के खिलाफ निर्णायक संघर्ष है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द कार्रवाई नहीं की तो आंदोलन और व्यापक होगा।

धरने में वयोवृद्ध किसान नेता चौधरी चरणसिंह समेत तेजपाल सिंह, ओम प्रकाश सिंह, सचिन चौधरी, रवि गुप्ता, मंसूर चौधरी, गंगाराम सिंह, धर्मवीर सिंह, महेंद्र सिंह, रामफल सिंह, होमपाल सिंह, इंद्रपाल सिंह, सादिक चौधरी, सोनू सिंह, जाहिद चौधरी और सुरेश सिंह सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।
