मुरादाबाद। बरेली में मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा देने के बाद लगातार चर्चा में बने अलंकार अग्निहोत्री सोमवार को अचानक मुरादाबाद पहुंचे। लाइनपार क्षेत्र स्थित राधे साड़ी शोरूम पर उनके समर्थकों ने फूल-मालाओं के साथ उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग उनसे मिलने पहुंचे और उन्होंने सभी से संवाद किया।
अलंकार अग्निहोत्री ने हाल ही में लागू किए गए यूजीसी रेगुलेशन 2026 और एससी-एसटी एक्ट को लेकर अपनी आपत्तियां सामने रखीं। उन्होंने आरोप लगाया कि 13 जनवरी 2026 को लागू किए गए यूजीसी रेगुलेशन को जानबूझकर मकर संक्रांति के अवकाश के दौरान 15 जनवरी को वेबसाइट पर अपलोड किया गया, ताकि इस पर व्यापक चर्चा न हो सके।
अग्निहोत्री का कहना था कि इस नई नियमावली में सुप्रीम कोर्ट द्वारा वर्ष 2018 में दिए गए कुछ महत्वपूर्ण दिशा-निर्देशों के विपरीत प्रावधान शामिल किए गए हैं। उन्होंने बिना प्रारंभिक जांच के गिरफ्तारी और एफआईआर दर्ज किए जाने को लेकर स्पष्ट और संतुलित व्यवस्था की मांग की।
उन्होंने कहा कि कॉलेजों में शिकायत निवारण के लिए समितियों का गठन तो किया गया है, जिनमें विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधि शामिल हैं, लेकिन यदि कोई मामला झूठा साबित होता है तो उसके लिए क्या कार्रवाई होगी, इसे लेकर नियमों में स्पष्टता नहीं है। इससे शिक्षण संस्थानों में भ्रम और तनाव की स्थिति बन सकती है।
अलंकार अग्निहोत्री ने यह भी आशंका जताई कि कुछ मामलों में व्यक्तिगत रंजिश के कारण झूठे आरोप लगाए जा सकते हैं, जिससे सामान्य वर्ग के छात्रों को मानसिक और सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि शिक्षा संस्थानों में सभी छात्रों के साथ समान व्यवहार होना चाहिए और किसी भी वर्ग के साथ अन्याय नहीं किया जाना चाहिए।
बिहार के दरभंगा का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहां कई मामलों में शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें से बड़ी संख्या के फर्जी होने के दावे सामने आए हैं, हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हो सकी है। उनके अनुसार, नए प्रावधानों से समाज में विभाजन की भावना को बढ़ावा मिल सकता है और कॉलेज परिसरों में छात्रों के आपसी संबंधों को जातीय दृष्टिकोण से देखने की प्रवृत्ति मजबूत हो सकती है।
