सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे X (ट्विटर), यूट्यूब, स्नैपचैट और फेसबुक पर अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से बनाए गए कंटेंट को स्पष्ट रूप से चिन्हित करना जरूरी होगा। इसके अलावा, डीपफेक वीडियो और तस्वीरों को अधिकतम 3 घंटे के भीतर हटाना भी अनिवार्य कर दिया गया है।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने मंगलवार को इस संबंध में आदेश जारी किया है। इसके तहत IT नियम 2021 में संशोधन किया गया है, जो 20 फरवरी से लागू होंगे। सरकार ने इन बदलावों का प्रारूप 22 अक्टूबर 2025 को जारी किया था।
इन नए नियमों का उद्देश्य AI और डीपफेक से तैयार सामग्री की पहचान और निगरानी सुनिश्चित करना है। अब ऐसे किसी भी कंटेंट में स्पष्ट तौर पर बताया जाएगा कि वह वास्तविक नहीं, बल्कि AI से तैयार किया गया है। इससे गलत सूचना फैलने और चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी जैसी समस्याओं को रोकने में मदद मिलेगी।
नए नियम 3(3) के अनुसार, जो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म AI से तैयार सामग्री को बनाने या साझा करने की सुविधा देंगे, उन्हें हर ऐसे कंटेंट पर स्पष्ट और प्रमुख लेबल लगाना होगा। साथ ही, उसमें स्थायी यूनिक मेटाडेटा या पहचान चिन्ह भी जोड़ना अनिवार्य होगा।
निर्देशों के अनुसार, यह लेबल किसी भी विजुअल कंटेंट के कम से कम 10% हिस्से पर दिखना चाहिए या ऑडियो कंटेंट के शुरुआती 10% समय में सुनाई देना चाहिए। इसके अलावा, इस मेटाडेटा को बदलना, छिपाना या हटाना संभव नहीं होगा। सोशल मीडिया कंपनियों को ऐसी तकनीक भी अपनानी होगी, जिससे कंटेंट अपलोड होने से पहले ही यह पता चल सके कि वह AI से तैयार किया गया है या नहीं।
नए IT नियमों में किए गए अन्य प्रमुख बदलाव
लेबल हटाना या छिपाना संभव नहीं होगा:
सोशल मीडिया कंपनियां AI लेबल या उससे जुड़े पहचान डेटा को हटाने या छिपाने की अनुमति नहीं देंगी। एक बार लेबल लगने के बाद उसे बनाए रखना अनिवार्य होगा।
आपत्तिजनक और भ्रामक सामग्री पर नियंत्रण:
सरकार ने कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे ऐसे ऑटोमेटेड सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करें, जो AI के जरिए बनाए गए गैरकानूनी, अश्लील या धोखाधड़ी वाले कंटेंट को रोक सकें।
हर तीन महीने में यूजर्स को चेतावनी देना जरूरी:
सोशल मीडिया कंपनियों को प्रत्येक तीन महीने में कम से कम एक बार अपने यूजर्स को नियमों की जानकारी और चेतावनी जारी करनी होगी। इसमें बताया जाएगा कि AI का गलत इस्तेमाल करने या नियमों का उल्लंघन करने पर सजा या जुर्माना लगाया जा सकता है।
यूजर्स और इंडस्ट्री पर प्रभाव
इन नियमों के लागू होने से यूजर्स फर्जी कंटेंट को आसानी से पहचान सकेंगे और गलत जानकारी के प्रसार में कमी आने की उम्मीद है। हालांकि, कंटेंट बनाने वालों को अब अतिरिक्त प्रक्रियाओं का पालन करना होगा, जैसे AI कंटेंट पर लेबल लगाना। वहीं, सोशल मीडिया कंपनियों को मेटाडेटा और वेरिफिकेशन सिस्टम विकसित करने के लिए तकनीकी निवेश करना पड़ेगा, जिससे उनके संचालन की लागत बढ़ सकती है।
फिर भी, इन नियमों को AI के दुरुपयोग को रोकने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
मंत्रालय का बयान
सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने कहा है कि इन नियमों का उद्देश्य इंटरनेट को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और जिम्मेदार बनाना है। यह कदम जनरेटिव AI से जुड़ी गलत सूचना, फर्जी पहचान और चुनावी हस्तक्षेप जैसे खतरों से निपटने में मदद करेगा, जिससे इंटरनेट पर भरोसा मजबूत होगा।
डीपफेक क्या होता है?
डीपफेक ऐसी नकली वीडियो या ऑडियो सामग्री होती है, जिसमें AI तकनीक की मदद से किसी व्यक्ति का चेहरा, आवाज या हाव-भाव बदल दिए जाते हैं। इस तकनीक से तैयार सामग्री इतनी वास्तविक लगती है कि असली और नकली के बीच फर्क करना बेहद मुश्किल हो जाता है।
