मुरादाबाद। सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) कार्यालय से जुड़े विवादित प्रकरण में खंड शिक्षा अधिकारी डॉ. वंदना सैनी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने उनके निलंबन आदेश को निरस्त करते हुए इसे न्यायोचित नहीं माना। साथ ही उन्हें फुल चार्ज देने का ऑर्डर किया है।
डॉ. सैनी को एडी बेसिक बुद्ध प्रिय सिंह की जांच आख्या के आधार पर निलंबित किया गया था। आरोप था कि उन्होंने दो सरकारी कार्यक्रमों को एक ही समयावधि में दर्शाते हुए दोनों मदों से भुगतान प्राप्त किया। यह कार्रवाई अभिषेक गौड़ नामक व्यक्ति की शिकायत के बाद की गई जांच रिपोर्ट पर आधारित थी।
हालांकि डॉ. वंदना सैनी ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया है। उनका कहना है कि शिकायतकर्ता एक बर्खास्त शिक्षक है और सुनियोजित तरीके से उनके खिलाफ बार-बार शिकायतें कराई जा रही हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विभाग के कुछ लोग मिलकर उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं। डा. सैनी ने पूरे प्रकरण की शिकायत महिला आयोग में भी की है। महिला आयोग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए मुरादाबाद पुलिस से रिपोर्ट तलब की है।
गौरतलब है कि जिस अधिकारी पर आरोप लगाए गए हैं, वह लंबे समय से मुरादाबाद में तैनात हैं। बुद्ध प्रिय सिंह करीब तीन वर्षों तक बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) रहे और बाद में पदोन्नत होकर सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) बनाए गए। वर्तमान में उनके पास मुरादाबाद और संभल के जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) का भी प्रभार है।
वहीं एडी बेसिक बुद्ध प्रिय सिंह ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि जांच पूरी तरह विभागीय नियमों के तहत की गई थी और लगाए गए आरोप निराधार हैं।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब इस पूरे प्रकरण को लेकर विभागीय हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
