अमरोहा। जनपद के औद्योगिक क्षेत्र गजरौला के शहबाजपुर डोर में चल रहे भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) संयुक्त मोर्चा के बेमियादी धरने में गुरुवार को किसानों का गुस्सा खुलकर सामने आया। मिट्टी और पानी के नमूनों की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक न किए जाने से नाराज किसानों ने प्रशासन और जांच समिति का पुतला दहन कर विरोध प्रदर्शन किया।

भाकियू संयुक्त मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश चौधरी के नेतृत्व में चल रहा यह आंदोलन अब केवल स्थानीय समस्या नहीं, बल्कि सरकारी दावों और जमीनी सच्चाई के बीच के अंतर पर बड़ा सवाल बनता जा रहा है। किसानों का आरोप है कि जिलाधिकारी द्वारा गठित समिति ने मृदा परीक्षण और जल जांच की रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं की है, जिससे ग्रामीणों में असमंजस और आशंका का माहौल है।

किसानों का कहना है कि गांवों में पेयजल संकट गहराता जा रहा है। जल जीवन मिशन के तहत हर घर नल से जल पहुंचाने का वादा किया गया था, लेकिन धरातल पर स्थिति अलग है। उनका दावा है कि बजट में बड़े प्रावधान दिखाए जाते हैं, परंतु योजनाओं का लाभ समय पर गांवों तक नहीं पहुंचता। सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी न मिलने से फसलें प्रभावित हो रही हैं और कई परिवारों को दूर-दराज से पानी लाना पड़ रहा है।

किसान नेताओं ने स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) और नमामि गंगे जैसी योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि स्वच्छता और जल संरक्षण से जुड़े वादों के बावजूद ठोस-तरल अपशिष्ट प्रबंधन और औद्योगिक प्रदूषण पर अपेक्षित सख्ती नहीं दिखाई दे रही।

प्रमुख सचिव अरुण सिद्धू और अल्पसंख्यक मोर्चा प्रभारी एवं मंडलाध्यक्ष एहसान अली समेत अन्य किसान नेताओं ने कहा कि सरकार बजट में बड़े आंकड़े प्रस्तुत करती है, लेकिन गांवों में मूलभूत सुविधाएं अब भी अधूरी हैं। उनका कहना है कि किसानों को घोषणाएं नहीं, बल्कि समय पर पानी, सिंचाई और स्वच्छता की ठोस व्यवस्था चाहिए।

धरने में हाजी नन्नु सैफी, अख्तर सैफी, होमपाल सिंह, ओम प्रकाश सिंह, खूबचंद, समरपाल सिंह, सोमपाल सिंह, जाकिर चौधरी, शकील चौधरी, देवेंद्र सिंह, इकराम सिंह सरदार, असद अली, गंगाराम सिंह, विजय सिंह, राजमणि देवी, प्रीति सिंह, कृष्णा देवी सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।
किसानों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई और पेयजल संकट का समाधान नहीं हुआ, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
