मुरादाबाद। जनपद में अवैध रूप से संचालित अस्पतालों और क्लीनिकों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग ने गुरुवार को बड़ा अभियान चलाया। जिला मजिस्ट्रेट के आदेश और मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) के निर्देश पर गठित टीमों ने अलग-अलग क्षेत्रों में औचक निरीक्षण कर कई संस्थानों पर कार्रवाई की। एक स्थान से नवजात शिशु को तत्काल एंबुलेंस से जिला अस्पताल भेजकर रेस्क्यू किया गया, जबकि बिना पंजीकरण और मानकों के संचालन पाए जाने पर उपकरण जब्त कर संस्थान सील कर दिए गए।
‘बच्चों के अस्पताल’ में न डॉक्टर, न पंजीकरण
आशियाना फेज 1 स्थित बचपन हेल्थ केयर के निरीक्षण के दौरान टीम को कोई पंजीकृत चिकित्सक या प्रशिक्षित पैरामेडिकल स्टाफ मौजूद नहीं मिला। जांच में सामने आया कि संस्थान “बच्चों के अस्पताल” के रूप में संचालित किया जा रहा था। मौके पर एक नवजात भर्ती मिला, जिसे टीम ने तुरंत जिला अस्पताल भिजवाया। निरीक्षण में आवश्यक अभिलेख भी प्रस्तुत नहीं किए गए। प्रथम दृष्टया अनियमितताएं पाए जाने पर उपलब्ध दवाएं और उपकरण जब्त कर संस्थान को सील कर दिया गया। जब्त सामान में वार्मर, मॉनिटर और इन्फ्यूजन पंप जैसे उपकरण शामिल हैं।

लोक शिकायत पर बंद मिला अस्पताल, बिना रजिस्ट्रेशन सेवा अस्पताल
कुंदरकी क्षेत्र के गांव जलालपुर में लोक शिकायत के आधार पर डॉक्टर कामिल के अस्पताल का निरीक्षण किया गया, जो मौके पर बंद मिला। ग्रामीणों ने बताया कि यह अस्पताल कई महीनों से बंद है। इसी क्रम में एक ‘सेवा हॉस्पिटल’ का भी निरीक्षण हुआ, जहां भवन स्वामी ने बताया कि अस्पताल का पंजीकरण नहीं हुआ है, इसलिए संचालन नहीं किया जा रहा।

बसेड़ा में अवैध क्लीनिक सील
ग्राम बसेड़ा में डॉ. शाहनवाज के नाम से संचालित क्लीनिक का निरीक्षण करने पर वह अवैध रूप से चलता पाया गया। मौके पर डॉक्टर मौजूद नहीं थे। सहायक स्टाफ से चिकित्सकीय डिग्री और अस्पताल के पंजीकरण संबंधी दस्तावेज मांगे गए, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके बाद टीम ने क्लीनिक के उपकरण जब्त कर परिसर सील कर दिया।

सीएमओ की चेतावनी
मुख्य चिकित्साधिकारी ने स्पष्ट कहा कि बिना वैध पंजीकरण और योग्य चिकित्सकीय स्टाफ के स्वास्थ्य सेवाएं चलाना पूर्णतः अवैध है। ऐसे संस्थानों के खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई जारी रहेगी। उन्होंने निजी अस्पतालों और क्लीनिक संचालकों को निर्देश दिए कि वे अपने पंजीकरण और मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करें, अन्यथा औचक निरीक्षण कर कठोर कदम उठाए जाएंगे।
स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई से अवैध रूप से संचालित संस्थानों में हड़कंप मच गया है। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि जनहित और खासकर बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।
