देश की सर्वोच्च अदालत में दायर एक जनहित याचिका में मांग की गई थी कि देश में कहीं भी बाबर या Babri Masjid के नाम पर नई मस्जिद न बनाई जाए और न ही किसी मस्जिद का नाम उसके नाम पर रखा जाए। याचिकाकर्ता का कहना था कि बाबर एक आक्रमणकारी था, इसलिए उसके नाम से किसी धार्मिक स्थल का निर्माण या नामकरण नहीं होना चाहिए।
इस मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने देशभर में इस तरह की रोक लगाने की मांग को स्वीकार नहीं किया, जिससे साफ हो गया कि इस विषय पर कोई सामान्य प्रतिबंध लागू नहीं होगा।
यह मुद्दा तब और चर्चा में आया था जब Humayun Kabir, जो All India Trinamool Congress से जुड़े रहे हैं, ने Murshidabad में 6 दिसंबर 2025 को बाबरी मस्जिद के निर्माण का शिलान्यास करने की घोषणा की थी। उसी दिन प्रतीकात्मक रूप से नींव भी रखी गई और 11 फरवरी से निर्माण कार्य शुरू होने की खबर सामने आई, जिसके बाद पश्चिम बंगाल से लेकर उत्तर प्रदेश तक इस मुद्दे पर राजनीतिक माहौल गरमा गया था। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद इस विवाद को लेकर स्थिति काफी हद तक स्पष्ट मानी जा रही है।
