अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक बड़ा झटका देते हुए उनके द्वारा लगाए गए व्यापक वैश्विक टैरिफ (Global Tariffs) को गैर-कानूनी और असंवैधानिक करार दिया।
- 6-3 का बहुमत: सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से यह फैसला सुनाया। मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने बहुमत का नेतृत्व किया, जबकि जस्टिस सैमुअल अलिटो, क्लेरेंस थॉमस और ब्रेट कवाना ने असहमति जताई।
- अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी संविधान के तहत टैरिफ (जो एक प्रकार का टैक्स है) लगाने की शक्ति केवल कांग्रेस (संसद) के पास है, राष्ट्रपति के पास नहीं।
- आपातकालीन शक्तियों का दुरुपयोग: ट्रंप ने 1977 के ‘इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट’ (IEEPA) का उपयोग करके ये टैरिफ लगाए थे। कोर्ट ने कहा कि यह कानून राष्ट्रपति को एकतरफा टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं देता है।
- प्रमुख टैरिफ रद्द: इस फैसले से ट्रंप के “लिबरेशन डे” टैरिफ, “रेसिप्रोकल” (पारस्परिक) टैरिफ और चीन, कनाडा व मैक्सिको पर लगे फेंटानिल से संबंधित टैरिफ प्रभावित होंगे।
भारत और वैश्विक बाजार पर असर:
- भारत को लाभ: इस फैसले के बाद अमेरिका को होने वाले भारत के लगभग 55% निर्यात पर लगा 18% पारस्परिक टैरिफ खत्म हो जाएगा।
- रिफंड की संभावना: अनुमान है कि सरकार को आयातकों से वसूले गए अरबों डॉलर (लगभग $130-$200 बिलियन) रिफंड करने पड़ सकते हैं।
- बाजार की प्रतिक्रिया: इस फैसले के बाद वॉल स्ट्रीट और वैश्विक बाजारों में सकारात्मक रुझान देखा गया है।
