अमरोहा। जनपद के गजरौला क्षेत्र में बहने वाली बगद नदी का प्रदूषण अब पर्यावरणीय संकट से आगे बढ़कर सामाजिक आंदोलन का रूप ले चुका है। नाईपुरा, शहबाजपुर डोर सहित आसपास के गांवों में रासायनिक इकाइयों से निकलने वाले जहरीले अपशिष्ट ने नदी और भूजल को गंभीर रूप से प्रभावित कर दिया है। ग्रामीणों के अनुसार पानी का रंग पीला पड़ चुका है, उसमें तीखी बदबू आती है और वह पीने योग्य नहीं रहा।
स्थानीय किसानों का कहना है कि दूषित जल के कारण कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के मामले बढ़ रहे हैं, पशुधन की मौतें हो रही हैं और खेतों की उपज प्रभावित हो रही है। उनका आरोप है कि औद्योगिक विकास की आड़ में पर्यावरण और ग्रामीण जीवन की अनदेखी की जा रही है।
इसी मुद्दे को लेकर भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) संयुक्त मोर्चा के बैनर तले शहबाजपुर डोर में राष्ट्रीय राजमार्ग 9 किनारे 65 दिनों से अधिक समय से धरना जारी है। धरनास्थल पर किसानों की आवाज बुलंद करते हुए प्रमुख सचिव अरुण सिद्धू और प्रदेशाध्यक्ष रामकृष्ण चौहान ने कहा, “जय किसान, तुम रहोगे मौन, तो तुम्हारी सुनेगा कौन?”
उन्होंने प्रश्न उठाया कि जब फसलों के उचित दाम नहीं मिल रहे, दूषित जल संकट बना हुआ है और सरकारी स्वास्थ्य व शिक्षा व्यवस्थाएं सुधर नहीं रहीं, तो फिर फैक्टरियों, राजमार्गों और तेज रफ्तार विकास परियोजनाओं का लाभ आम किसान को कैसे मिलेगा?
धरना अब केवल प्रदूषण के विरोध तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह किसानों की सामूहिक अस्मिता, जागरूकता और अधिकारों की लड़ाई का प्रतीक बन चुका है।

अल्पसंख्यक मोर्चा प्रभारी एवं मंडलाध्यक्ष एहसान अली ने आरोप लगाया कि कुछ उद्योगपति सस्ते श्रम के लिए क्षेत्र को जानबूझकर पिछड़ा बनाए रखना चाहते हैं।
गांव-गांव चलाए जा रहे अभियान के माध्यम से आंदोलन को जनसमर्थन मिल रहा है। किसान इसे जल संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और सामूहिक स्वास्थ्य की रक्षा का संघर्ष बता रहे हैं।
किसानों का स्पष्ट कहना है कि जब तक दूषित जल से मुक्ति, पर्यावरणीय क्षति की भरपाई और नाईपुरा के प्रभावित किसानों को न्याय नहीं मिलता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
धरने में गंगाराम, मंसूर अली, राम प्रसाद, अशोक कुमार, विजय चौधरी, होमपाल सिंह, ओमप्रकाश, विजय सिंह, पृथीसिंह, समरपाल सिंह, सीसपाल सिंह, रामसरन सिंह, जसवंत सिंह, सुरेश चंद, अदनान अली, अशद अली सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।
