अमरोहा। अमरोहा जिले के गजरौला-नाईपुरा क्षेत्र में रासायनिक कारखानों से निकलने वाले जहरीले अपशिष्ट ने बगद नदी और भूजल को गंभीर रूप से दूषित कर दिया है। भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) संयुक्त मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश चौधरी ने कहा कि संस्थागत भ्रष्टाचार और संगठित अपराध का डीएनए एक जैसा है, जिसके कारण पिछले 70 दिनों से शहबाजपुर डोर में धरने पर बैठे किसानों की सुनवाई में देरी हो रही है। गौरतलब है कि जैसे-जैसे प्रशासन द्वारा जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने में हीलाहवाली की जा रही है धरने को किसान जत्थेबंदियों का लगातार समर्थन बढ़ता जा रहा है। इसी सिलसिले में शनिवार को तहसील हसनपुर क्षेत्र के गांव कबीरपुर से ट्रैक्टर ट्रालियों में भरकर किसान धरना स्थल पर पहुंचे और जरूरत पड़ने पर संघर्ष में साथ देने का वादा किया।

उन्होंने आरोप लगाया कि कथित विकास के नाम पर आपराधिक तत्वों ने नाईपुरा गांव की मिट्टी की प्राकृतिक सुगंध छीन ली है। चौधरी ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि 1750 तक भारत विश्व जीडीपी का 25% हिस्सा रखता था, जब समाज स्व-प्रशासित था, लेकिन आधुनिक कानून और औद्योगिक विकास ने धरती-पानी की लूट को बढ़ावा दिया। उन्होंने वर्तमान नीतियों को पूंजीपतियों के हितों तक सीमित बताते हुए गांधी और चौधरी चरण सिंह जैसे विचारकों की उपेक्षा पर चिंता जताई।

प्रदूषण के स्वास्थ्य प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए प्रदेशाध्यक्ष रामकृष्ण चौहान ने अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों का हवाला दिया, जिनमें वायु में पीएम2.5 के हर 10 माइक्रोग्राम/घन मीटर बढ़ने से डिमेंशिया का जोखिम 40% और अल्जाइमर का 47% तक बढ़ सकता है। गजरौला क्षेत्र में पीएम2.5 स्तर डब्ल्यूएचओ मानकों से कई गुना अधिक है, जिससे दिमाग में सूजन, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ रहा है और याददाश्त कमजोर हो रही है। महिलाओं में सोचने-समझने की क्षमता प्रभावित हो रही है, जबकि बुजुर्गों में डिमेंशिया का संकट गहरा सकता है।

अल्पसंख्यक मोर्चा प्रभारी एवं मंडलाध्यक्ष एहसान अली ने कहा कि जिलाधिकारी निधि गुप्ता वत्स द्वारा दूषित जल-मिट्टी की जांच के लिए कमेटी गठित कर दी गई है, लेकिन किसान रिपोर्ट और ठोस कार्रवाई की मांग पर अड़े हैं।

इस मौके पर भाकियू संयुक्त मोर्चा ने धरने पर बैठे किसानों को भरोसा दिलाया कि प्रदूषण से किसी को मरने नहीं दिया जाएगा। साथ ही न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की मांग के साथ किसान रेवड़ी कल्चर और गुमराह राजनीति की आलोचना कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदूषण नियंत्रण से अल्जाइमर जैसे मामलों को रोका जा सकता है। यह मुद्दा अब केवल पर्यावरण का नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य और याददाश्त को बचाने का है।

इस मौके पर मुख्य रूप से होमपाल सिंह, ओम प्रकाश सिंह, इंद्रपाल सिंह, गंगाराम सिंह, सलमान चौधरी, साजिद चौधरी, समर पाल सैनी,साजिद अली, रामप्रसाद, सुखराम सिंह, पृथ्वी सिंह, अजमल सैफी, मंसूर अली, शकीरा चौधरी, जरार चौधरी, दिलशाद चौधरी, शादाब चौधरी समेत तमाम किसान लोग मौजूद रहे।
