अमरोहा। जिले के गजरौला-नाईपुरा क्षेत्र में रासायनिक कारखानों से निकलने वाले अपशिष्ट के कारण भूजल प्रदूषण को लेकर किसानों और महिलाओं का आक्रोश चरम पर है। शहबाजपुर डोर में भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) संयुक्त मोर्चा के बैनर तले चल रहा अनिश्चितकालीन धरना मंगलवार को 73वें दिन में प्रवेश कर गया।

धरना स्थल पर सैकड़ों महिलाएं ट्रैक्टर-ट्रालियों में पहुंचीं और शासन-प्रशासन व जिम्मेदार कारखानों के खिलाफ पुतला दहन कर जोरदार विरोध दर्ज कराया। महिलाओं और किसानों ने सर्वसम्मति से ऐलान किया कि जब तक गजरौला-नाईपुरा क्षेत्र को आपदा प्रभावित घोषित नहीं किया जाता, स्वास्थ्य आपातकाल लागू नहीं होता और दूषित जल संकट का स्थायी समाधान नहीं होता, तब तक किसान होली और रंग एकादशी सहित कोई भी त्योहार नहीं मनाएंगे।
‘जहर बन चुका है पानी’
आंदोलनकारियों का आरोप है कि रासायनिक इकाइयों से निकलने वाला जहरीला अपशिष्ट भूजल को ‘साइलेंट किलर’ बना चुका है। दूषित पानी के कारण ग्रामीणों में असाध्य बीमारियां बढ़ रही हैं, फसलें प्रभावित हो रही हैं और दुधारू पशुओं के स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि यह केवल पर्यावरणीय संकट नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक आपदा है।

भाकियू संयुक्त मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश चौधरी ने कहा, “एक ओर सरकार कैमिकल युक्त रंगों से होली न खेलने की अपील करती है, दूसरी ओर रासायनिक कारखाने पूरे इलाके के पानी को जहर बनाकर लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं। प्रशासन के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही।”
स्वास्थ्य आपातकाल की मांग
प्रमुख सचिव अरुण सिद्धू और प्रदेशाध्यक्ष रामकृष्ण चौहान ने कहा कि कैमिकल गैसों और दूषित पानी का असर केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं है। इससे जनसंख्या संरचना, लिंगानुपात और आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
जिला पंचायत सदस्य धर्मपाल सिंह खड़गवंशी ने कहा कि आसपास के गांवों से महिलाओं की बड़ी भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि क्षेत्र को तत्काल आपदा एवं स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया जाना चाहिए।

अल्पसंख्यक मोर्चा प्रभारी एवं मंडलाध्यक्ष एहसान अली ने मांग की कि निष्पक्ष जांच कर दोषी कारखानों पर सख्त कार्रवाई की जाए, दूषित जल स्रोतों की सफाई कराई जाए और प्रभावित परिवारों को मुआवजा दिया जाए।

प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार
धरना 73वें दिन में प्रवेश कर चुका है, लेकिन आंदोलनकारियों के अनुसार अब तक कोई ठोस प्रशासनिक कदम नहीं उठाया गया है। किसानों और महिलाओं ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक दूषित जल संकट का समाधान नहीं होगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
इस अवसर पर प्रदेश अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह, सुरजीत सिंह (मंडल अध्यक्ष), चौधरी चरण सिंह, कैलाशो, विमला, मुन्नी, ओमवती, कुसुम, सीना, लेलुम, अंगूरी, रामचरण, भगवती, देवंदरी, संतोष, बीरा, बीरवती, दयावती, कश्मीरी, सोमवती, मुस्सरात, नूरजहाँ, सूरज, मंसूर अली, समरपाल सिंह, सोमपाल सिंह, राम प्रसाद, देवराज सिंह, यशपाल सिंह, दिगराज सिंह, जसपाल सिंह, राजेंद्र सिंह, मुकाम सिंह, गंगाराम सिंह, होमपाल सिंह, पृथ्वी सिंह,चंद्रपाल सिंह, बिरेंद्र सैनी, नेपाली, ओमप्रकाश सिंह, रोशन सिंह, गणपत सिंह, सूखे सिंह, तेजपालसिंह आदि समेत तमाम किसान मौजूद रहे।
