मुरादाबाद। People For Animals (PFA) मुरादाबाद इकाई ने होली के पर्व पर लोगों से बेजुबान पशुओं के प्रति संवेदनशील रहने की अपील की है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि आवारा कुत्तों, बिल्लियों और गायों पर रासायनिक रंग डालना न केवल अमानवीय है, बल्कि यह दंडनीय अपराध भी हो सकता है।
संगठन की यह मुहिम मेनका गांधी के निर्देशन में चलाई जा रही है, जिसमें त्योहारों के दौरान पशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
रासायनिक रंग बन सकते हैं जानलेवा
PFA पदाधिकारियों के अनुसार बाजार में बिकने वाले कई रंगों में ऐसे रसायन होते हैं जो पशुओं की त्वचा, आंखों और श्वसन तंत्र के लिए बेहद हानिकारक साबित हो सकते हैं। जानवर इन रंगों को चाट लेते हैं, जिससे उन्हें विषाक्तता, एलर्जी, संक्रमण और कई बार गंभीर बीमारियों का सामना करना पड़ता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पशुओं की त्वचा इंसानों की तुलना में अधिक संवेदनशील होती है। रंगों में मौजूद सीसा, क्रोमियम और अन्य हानिकारक तत्व उनकी जान के लिए खतरा बन सकते हैं।
सख्त कार्रवाई की मांग
PFA मुरादाबाद की अध्यक्ष करुणा शर्मा ने पुलिस प्रशासन से अपील की है कि त्योहार के दौरान पशुओं के साथ क्रूरता करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि “होली खुशी और प्रेम का पर्व है, लेकिन कुछ लोग मस्ती के नाम पर बेजुबानों पर रंग डालकर उन्हें पीड़ा पहुंचाते हैं, जो किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है।”
उन्होंने आगे कहा कि यदि किसी व्यक्ति को पशुओं पर जबरन रंग डालते हुए पाया गया, तो उसके खिलाफ पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए।
“होली इंसानियत का पर्व है,हैवानियत का नहीं”
संगठन ने नागरिकों से अपील की है कि त्योहार की खुशी में बेजुबानों का दर्द न छिपे। होली पर प्राकृतिक और सुरक्षित रंगों का उपयोग करें, पशुओं को जबरन पकड़कर रंग न लगाएं और न ही उन पर पानी या गुब्बारे फेंकें।
PFA की ओर से शहरवासियों को यह संदेश दिया गया है कि सच्ची होली वही है, जिसमें प्रेम, भाईचारा और करुणा का रंग हो।
