इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मस्जिद में नमाज़ियों की संख्या तय करने के फैसले पर सख्त नाराज़गी जताई है। अदालत ने कहा कि प्रशासन यह तय नहीं कर सकता कि किसी मस्जिद में कितने लोग नमाज़ पढ़ेंगे।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने संभल प्रशासन को फटकार लगाते हुए कहा कि अगर अधिकारी कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सक्षम नहीं हैं, तो उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए या फिर कहीं और तबादला करवा लेना चाहिए।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार की जिम्मेदारी है कि वह हर हाल में कानून का राज कायम रखे और सभी समुदायों को उनके निर्धारित पूजा स्थलों पर शांति से पूजा-अर्चना करने की पूरी आज़ादी मिले।
यह मामला मुनाज़िर खान द्वारा दाखिल याचिका के जरिए हाईकोर्ट पहुंचा था। याचिका में बताया गया कि प्रशासन ने संबंधित मस्जिद में एक समय में केवल 20 लोगों को ही नमाज़ पढ़ने की अनुमति दी है।
याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि मस्जिद परिसर में इससे कहीं अधिक लोग आसानी से नमाज़ अदा कर सकते हैं। खासकर रमज़ान के महीने में बड़ी संख्या में रोज़ेदार नमाज़ पढ़ने के लिए आते हैं।
मामले की अगली सुनवाई अब 16 मार्च को होगी। यह आदेश जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की डिवीजन बेंच ने दिया है।
