मुरादाबाद। करीब 15 साल पुराने मैनाठेर बवाल कांड में सोमवार को एडीजे-2 कोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए 16 आरोपियों को दोषी करार दिया। अदालत का निर्णय आते ही कोर्ट में मौजूद 14 दोषियों को पुलिस ने हिरासत में लेकर जेल भेज दिया, जबकि दो दोषी सुनवाई के दौरान अनुपस्थित रहे। अब इस चर्चित मामले में सजा का ऐलान 27 मार्च को किया जाएगा।
यह मामला 6 जुलाई 2011 को मैनाठेर थाना क्षेत्र के डींगरपुर में हुए भीषण बवाल से जुड़ा है, जिसमें तत्कालीन डीआईजी अशोक कुमार सिंह पर जानलेवा हमला किया गया था। अदालत ने डीआईजी की बेरहमी से पिटाई, आगजनी और हिंसा के मामलों में सभी दोषियों को साक्ष्यों के आधार पर दोषी माना।
25 आरोपियों पर चला मुकदमा, 16 दोषी ठहराए गए
अभियोजन पक्ष के अनुसार, इस मामले में पुलिस ने परवेज आलम समेत 25 लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था।




सुनवाई के दौरान तीन आरोपियों की मृत्यु हो गई, जबकि छह नाबालिग होने के कारण उनका मामला किशोर न्याय बोर्ड में विचाराधीन रहा।



शेष आरोपियों में से 16 आरोपियों मंजूर अहमद पुत्र मोहम्मद यूनुस निवासी डींगरपुर मुरादाबाद,मोहम्मद अली पुत्र अफसर निवासी डींगरपुर, हाशिम पुत्र हाजी भोलू निवासी ललवारा थाना मैनाठेर मुरादाबाद,फिरोज पुत्र नन्हें निवासी ताहरपुर थाना मैनाठेर, कमरूल पुत्र बाबू, मोहम्मद नाजिम पुत्र मोहम्मद हुसैन निवासी असदपुर थाना मैनाठेर, मोहम्मद यूनुस पुत्र मोहम्मद यूसुफ, मोहम्मद रिजवान पुत्र मुस्तफा निवासी लालपुर थाना मैनाठेर, अम्बरीश पुत्र अनवार निवासी शाहपुर चमारान मुरादाबाद, कासिम पुत्र इकबाल निवासी परयावली थाना असमोली मुरादाबाद (वर्तमान में संभल), मोहम्मद मोबीन उर्फ मोहम्मद मोहसिन पुत्र शौकत निवासी बरखेड़ा थाना डिडौली अमरोहा, परवेज आलम पुत्र आसिफ निवासी मिलक फतेहपुर थाना मैनाठेर मुरादाबाद,मोहम्मद मुजीब पुत्र बाबू जमील उर्फ जमीर अहमद, तहजीब आलम पुत्र हाजी जमील उर्फ जमीर अहमद निवासी असदपुर थाना मैनाठेर और जाने आलम पुत्र जुम्मा निवासी मिलक नवाब थाना मैनाठेर मुरादाबाद को अदालत ने दोषी करार दिया।




एडीजीसी ब्रजराज सिंह और डीजीसी नितिन गुप्ता ने बताया कि कोर्ट के आदेश के बाद मौजूद 14 दोषियों को हिरासत में लेकर जेल भेजा गया।



जेल भेजने से पहले सभी का मेडिकल परीक्षण भी कराया गया।
डीआईजी पर हुआ था जानलेवा हमला
घटना के दौरान बवाल को काबू करने पहुंचे तत्कालीन डीएम राजशेखर और डीआईजी अशोक कुमार सिंह पर उग्र भीड़ ने हमला बोल दिया था। हालात इतने बिगड़ गए कि डीआईजी भीड़ के बीच घिर गए और उन पर बेरहमी से हमला किया गया।

उनकी सरकारी पिस्टल छीन ली गई, वर्दी फाड़ दी गई और उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया गया। इस हमले में उनके शरीर में कई फ्रैक्चर हुए और वे लंबे समय तक मरणासन्न स्थिति में रहे।
हिंसा और आगजनी से दहला था इलाका
घटना के दौरान उत्तेजित भीड़ ने मुरादाबाद-संभल मार्ग को जाम कर दिया था और मैनाठेर थाने, पुलिस चौकी व पीएसी वाहनों में आग लगा दी थी। पूरा इलाका हिंसा की चपेट में आ गया था, जिससे प्रशासन को हालात संभालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।
ऐसे भड़का था विवाद
बताया जाता है कि मैनाठेर पुलिस एक छेड़छाड़ के आरोपी की गिरफ्तारी के लिए गांव में दबिश देने पहुंची थी। इसी दौरान आरोपी पक्ष ने धार्मिक पुस्तक के अपमान का आरोप लगाया, जिससे माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया और देखते ही देखते हिंसा भड़क उठी।
यह कांड उस समय पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना था। अब वर्षों बाद आए इस फैसले ने एक बार फिर उस भयावह घटना की याद ताजा कर दी है, जबकि सभी की नजरें अब 27 मार्च को होने वाले सजा के ऐलान पर टिकी हैं।
