लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अब जमीन के उपयोग (लैंड यूज) को बदलवाने की जटिल प्रक्रिया से लोगों को राहत मिलने जा रही है। योगी सरकार ने शहरी क्षेत्रों में निर्माण कार्य को आसान बनाने के लिए बड़ा निर्णय लिया है। अब विकास प्राधिकरण क्षेत्रों में अगर किसी जमीन का नक्शा पास हो जाता है, तो उसका लैंड यूज अपने आप बदला हुआ माना जाएगा।
सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक में राजस्व संहिता की धारा 80 में संशोधन को मंजूरी दी गई। पहले नियम यह था कि अगर किसी कृषि भूमि का उपयोग आवासीय या व्यावसायिक काम के लिए करना हो, तो पहले उसका लैंड यूज बदलवाना जरूरी होता था। बिना इस प्रक्रिया के न तो जमीन बेची जा सकती थी और न ही उस पर निर्माण संभव था।
लेकिन अब नए फैसले के बाद, यदि विकास प्राधिकरण या विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण किसी जमीन पर निर्माण के लिए नक्शा पास कर देता है, तो यह माना जाएगा कि उस जमीन का उपयोग उसी काम के लिए मान्य है। यानी अब अलग से लैंड यूज बदलवाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
सरकार का मानना है कि इस बदलाव से लंबे समय से लंबित पड़े मामलों का निस्तारण तेजी से होगा। पहले लैंड यूज बदलने के प्रस्ताव मुख्य नगर एवं ग्राम नियोजक के पास भेजे जाते थे, जहां फैसले में काफी देरी होती थी। इससे कई प्रोजेक्ट अटक जाते थे।
अब प्रक्रिया को सरल बनाकर सरकार निवेश और निर्माण को बढ़ावा देना चाहती है। यह कदम प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जल्द ही राजस्व विभाग इस नए नियम को लागू करने के लिए विस्तृत गाइडलाइन जारी करेगा, जिससे लोगों को और अधिक स्पष्टता मिल सकेगी।
