PM मोदी ने महिला आरक्षण बिल को लेकर एक लेख के जरिए इसकी अहमियत समझाई है। उन्होंने कहा कि विधानसभाओं और संसद में महिलाओं को आरक्षण देना समय की जरूरत है, जिससे लोकतंत्र और ज्यादा मजबूत, समावेशी और भागीदारी वाला बनेगा। उन्होंने साफ कहा कि इस फैसले में अब और देरी होना दुर्भाग्यपूर्ण होगा।
प्रधानमंत्री ने अपने लेख में लिखा कि भारत एक ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है, जहां लोकतंत्र को और व्यापक बनाने का अवसर सामने है। यह कदम महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को नई ताकत देगा और उन्हें लोकसभा व विधानसभाओं में उचित प्रतिनिधित्व दिलाएगा।
उन्होंने देश के विभिन्न त्योहारों—जैसे बिहू, बैसाखी और नववर्ष उत्सवों—का जिक्र करते हुए कहा कि यह समय सकारात्मक ऊर्जा और नए संकल्पों का है। इसी बीच अप्रैल में संसद का विशेष सत्र बुलाया गया है, जहां महिला आरक्षण से जुड़े अहम विधेयक पर चर्चा और उसे पारित करने की कोशिश होगी। पीएम के मुताबिक यह सिर्फ कानून नहीं, बल्कि करोड़ों महिलाओं की उम्मीदों का प्रतीक है।
मोदी ने कहा कि देश की आधी आबादी यानी महिलाएं हर क्षेत्र में बेहतरीन प्रदर्शन कर रही हैं—चाहे विज्ञान हो, खेल, सेना या कारोबार। इसके बावजूद राजनीति में उनका प्रतिनिधित्व अभी भी कम है, जिसे अब सुधारने की जरूरत है।
उन्होंने यह भी बताया कि बीते वर्षों में सरकार ने शिक्षा, स्वास्थ्य, वित्तीय समावेशन और बुनियादी सुविधाओं के जरिए महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में काम किया है। लेकिन असली संतुलन तब आएगा जब महिलाएं नीति निर्माण और प्रशासनिक फैसलों में भी बराबर की भागीदारी निभाएंगी।
प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि सितंबर 2023 में संसद द्वारा ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पास किया गया था और अब लक्ष्य है कि 2029 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव इस आरक्षण प्रावधान के तहत कराए जाएं।
अपने लेख के अंत में उन्होंने कहा कि यह मुद्दा किसी एक पार्टी या सरकार का नहीं, बल्कि पूरे देश का है। सभी दलों को मिलकर इस ऐतिहासिक कदम का समर्थन करना चाहिए, ताकि लोकतंत्र को और न्यायपूर्ण व समावेशी बनाया जा सके।
