सबरीमाला मंदिर से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है और गुरुवार को यह सुनवाई तीसरे दिन में प्रवेश कर गई। नौ जजों की संवैधानिक पीठ इस केस की सुनवाई कर रही है, जिसमें सात अहम संवैधानिक सवाल तय किए गए हैं। कोर्ट में हो रही बहस इन्हीं सवालों के दायरे में आगे बढ़ रही है, हालांकि यह दायरा इतना व्यापक है कि चर्चा कई पहलुओं तक पहुंच रही है।
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील देते हुए कहा कि देश में ऐसे कई मंदिर भी हैं जहां पुरुषों के प्रवेश पर पाबंदी है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि कुछ जगहों पर पुरुष पुजारियों को महिला श्रद्धालुओं के पैर धोने होते हैं, वहीं केरल के एक मंदिर में पुरुषों को महिलाओं के वस्त्र पहनकर जाना पड़ता है। उनके मुताबिक, ये उदाहरण दिखाते हैं कि धार्मिक परंपराएं केवल पुरुष या महिला केंद्रित नहीं होतीं।
तुषार मेहता ने स्पष्ट किया कि उनकी दलीलें केवल संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 तक सीमित हैं और उन्होंने मंदिरों पर सरकारी नियंत्रण जैसे मुद्दों पर कोई पक्ष नहीं रखा। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने भी कहा कि पीठ केवल तय किए गए सात कानूनी सवालों पर ही विचार कर रही है। इसके बाद केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने अपनी बात रखी।
वहीं, वरिष्ठ अधिवक्ता वैद्यनाथन ने सबरीमाला मंदिर की परंपराओं का पक्ष रखते हुए कहा कि यहां किसी धर्म विशेष के लोगों के प्रवेश पर रोक नहीं है। उन्होंने कहा कि मंदिर में प्रवेश के लिए जरूरी है कि श्रद्धालु भगवान अयप्पा में आस्था रखें और 40 दिनों का व्रत समेत सभी धार्मिक नियमों का पालन करें।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सुंदरेश ने भी टिप्पणी करते हुए कहा कि केरल के कुछ मंदिरों में ड्रेस कोड का पालन अनिवार्य है और वहां पैंट-शर्ट पहनकर प्रवेश नहीं किया जा सकता। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने गुरुवायुर मंदिर का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी शर्ट पहनकर जाने की अनुमति नहीं है।
