मध्य पूर्व में जारी नाज़ुक संघर्षविराम के बीच अब पूरी दुनिया की नज़र पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पर टिकी हुई है। 11 अप्रैल से यहां अमेरिका और ईरान के बीच अहम और बहुप्रतीक्षित वार्ता शुरू होने जा रही है। इस हाई-प्रोफाइल मीटिंग को देखते हुए इस्लामाबाद को पूरी तरह हाई-सिक्योरिटी ज़ोन में बदल दिया गया है।
शहर के कई हिस्सों, खासकर ‘रेड ज़ोन’, में सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं। इस इलाके में संसद भवन, सरकारी दफ्तर, दूतावास और बड़े होटल मौजूद हैं। यहां आम लोगों की आवाजाही सीमित कर दी गई है और कई रास्तों को पूरी तरह बंद कर दिया गया है। शहर भर में सुरक्षा बल तैनात हैं और जगह-जगह चेकिंग के लिए बैरिकेड्स लगाए गए हैं। विदेशी प्रतिनिधिमंडलों की आवाजाही को ध्यान में रखते हुए ट्रैफिक रूट भी बदले गए हैं।
स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने राजधानी में दो दिन का सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है। स्कूल, बाजार और कई संस्थान बंद हैं, जिससे सड़कों पर काफी सन्नाटा देखने को मिल रहा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान के आंतरिक मंत्री मोहसिन नकवी ने अमेरिकी अधिकारियों को भरोसा दिलाया है कि उनकी सुरक्षा में कोई कमी नहीं छोड़ी जाएगी। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की सुरक्षा के मद्देनज़र 30 सदस्यीय अग्रिम टीम पहले ही इस्लामाबाद पहुंच चुकी है। हालांकि, कुछ अमेरिकी पूर्व अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता भी जताई है।
सिर्फ ज़मीन ही नहीं, बल्कि आसमान में भी सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम किए गए हैं। पाकिस्तान वायु सेना ने विशेष विमानों और फाइटर जेट्स की तैनाती की है, ताकि किसी भी संभावित खतरे से निपटा जा सके। रिपोर्ट्स के अनुसार, निगरानी के लिए एडवांस सिस्टम भी सक्रिय किए गए हैं, जिससे पूरे एयरस्पेस पर कड़ी नज़र रखी जा रही है।
इस बीच, पाकिस्तान सरकार ने वार्ता में शामिल प्रतिनिधियों और पत्रकारों के लिए वीजा-ऑन-अराइवल की सुविधा भी शुरू की है। एयरपोर्ट पर इसके लिए विशेष काउंटर बनाए गए हैं, ताकि आगमन प्रक्रिया आसान और तेज़ हो सके।
अब पूरी दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच यह अहम बातचीत क्या रंग लाती है और पाकिस्तान इस मध्यस्थता की जिम्मेदारी को कितनी सफलतापूर्वक निभा पाता है।
