मुरादाबाद। थाना मझोला क्षेत्र के आज़ाद नगर स्थित बैतूस सलात इमामबाड़े में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम में उनका जोरदार स्वागत किया गया। इस मौके पर शिया और सुन्नी दोनों समुदायों के लोग बड़ी संख्या में मौजूद रहे, जिससे आपसी सौहार्द की झलक देखने को मिली।

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने आपसी एकता पर जोर देते हुए कहा कि मौजूदा समय में शिया और सुन्नी समुदाय को अपने मतभेद भुलाकर साथ खड़ा होना चाहिए। उन्होंने समाज में भाईचारा और सामंजस्य बनाए रखने की अपील की।

अपने संबोधन में डॉ. इलाही ने भारतीयों के प्रति आभार जताते हुए कहा कि यहां के लोग सच्चाई और न्याय के पक्षधर हैं। उन्होंने कहा, “भारत के लोग न्याय का सम्मान करते हैं, जो समाज को मजबूती प्रदान करता है।”

इस दौरान उन्होंने ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव और हालिया युद्धविराम पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि ईरान कभी भी युद्ध के पक्ष में नहीं रहा और न ही उसने इस संघर्ष की शुरुआत की।
डॉ. इलाही ने स्पष्ट किया कि ईरान की नीति हमेशा शांति और स्थिरता पर आधारित रही है। “हम न तो युद्ध चाहते हैं और न ही किसी तरह का टकराव बढ़ाना चाहते हैं। हमारा उद्देश्य हमेशा क्षेत्र में संतुलन और शांति बनाए रखना रहा है,” उन्होंने कहा।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि इस क्षेत्र में तनाव बढ़ता है, खासकर होरमुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे अहम समुद्री मार्ग पर, तो इसका असर वैश्विक स्तर पर पड़ेगा। इससे व्यापार, तेल आपूर्ति और अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

डॉ. इलाही ने चेतावनी दी कि किसी भी तरह के संघर्ष का प्रभाव आम लोगों पर भी पड़ता है और इससे कई देशों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि विवादों को बातचीत और कूटनीति के माध्यम से सुलझाया जाए।
कार्यक्रम के जरिए एक ओर जहां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति का संदेश दिया गया, वहीं स्थानीय स्तर पर भी एकता और भाईचारे को मजबूत करने पर बल दिया।
