अमरोहा। प्रदेश सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त पत्रकारों और उनके परिजनों को कैशलेस इलाज की सुविधा देने के उद्देश्य से शुरू की गई आयुष्मान योजना जनपद में विभागीय उदासीनता और नोडल एजेंसी की कथित लापरवाही की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के बावजूद योजना धरातल पर दम तोड़ती दिखाई दे रही है और बीमार पत्रकार सरकारी दावों के बीच इलाज के लिए भटकने को मजबूर हैं।
सूचना विभाग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक मान्यता प्राप्त पत्रकारों का डेटा कई बार जिला सूचना कार्यालय के माध्यम से निदेशालय भेजा जा चुका है। अपर जिला सूचना अधिकारी दानिश अली का कहना है कि मई माह में भी डेटा अपडेट कर पुनः प्रेषित किया गया, लेकिन हैरानी की बात यह है कि नोडल एजेंसी “साचीज” के जिम्मेदार अधिकारी डेटा प्राप्त होने से ही इनकार कर रहे हैं। कभी डेटा करेक्शन तो कभी तकनीकी खामी का हवाला देकर फाइलों को महीनों से लटकाया जा रहा है।
सबसे गंभीर सवाल यह है कि आखिर जब सरकार पत्रकारों को स्वास्थ्य सुरक्षा देने का दावा कर रही है, तो फिर एक साल बाद भी आयुष्मान कार्ड क्यों नहीं बन सके? सरकारी दफ्तरों के दावों और एजेंसी की सफाई के बीच पत्रकारों की जिंदगी पिस रही है।
स्थिति की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जनपद के वरिष्ठ एवं सम्मानित पीटीआई संवाददाता डॉ. मुस्तकीम का 6 मार्च को निधन हो गया, लेकिन जीवन के अंतिम समय तक उनका आयुष्मान कार्ड जारी नहीं हो सका। यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि व्यवस्था की संवेदनहीनता पर बड़ा सवाल है। वर्तमान में भी कई वरिष्ठ पत्रकार गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं और आर्थिक व स्वास्थ्य संकट के बीच इलाज के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
पत्रकारों का आरोप है कि जिस योजना को सुरक्षा कवच बनना था, वह फाइलों और पोर्टलों में उलझकर मजाक बन चुकी है। सवाल उठ रहे हैं कि यदि मान्यता प्राप्त पत्रकारों के साथ यह स्थिति है, तो आम नागरिकों को कितनी परेशानियों का सामना करना पड़ता होगा।
पत्रकारों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा है कि मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषी अधिकारियों और एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई की जाए तथा लंबित आयुष्मान कार्ड तत्काल जारी कराए जाएं, ताकि भविष्य में किसी पत्रकार को इलाज के अभाव में असमय जान न गंवानी पड़े।
गौरतलब है कि “साचीज” यानी स्टेट एजेंसी फॉर कॉम्प्रिहेन्सिव हेल्थ एंड इंटीग्रेटेड सर्विसेज को योजना के क्रियान्वयन और डिजिटल प्रक्रिया की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर National Health Authority आयुष्मान भारत योजना के संचालन की नोडल संस्था है। बावजूद इसके, जमीनी हकीकत सरकारी दावों से बिल्कुल अलग नजर आ रही है।
