मुरादाबाद। कठिन परिस्थितियां अगर इरादों के सामने झुक जाएं तो संघर्ष सफलता की सबसे बड़ी कहानी बन जाता है। इसी जज्बे की मिसाल हैं अंतरराष्ट्रीय पैरा टेबल टेनिस खिलाड़ी Kunal Arora, जिन्होंने थैलेसीमिया जैसी गंभीर बीमारी और पैर की सर्जरी जैसी चुनौतियों के बावजूद न केवल खुद को संभाला, बल्कि भारत का नाम अंतरराष्ट्रीय मंच पर रोशन किया।

करीब 27 वर्षों से थैलेसीमिया से संघर्ष कर रहे कुनाल अरोड़ा ने वर्ष 2010 में पैर की सर्जरी के बाद भी हार नहीं मानी। उन्होंने टेबल टेनिस को अपने जुनून और जीवन का लक्ष्य बनाया। आज वह देश के उन चुनिंदा खिलाड़ियों में शामिल हैं जिन्होंने लगातार अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व कर उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं।
कुनाल अरोड़ा ने वर्ष 2026 में ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट ओपन, 2025 में चीन में आयोजित एशियन चैंपियनशिप और ताइवान की काओशुंग ओपन चैंपियनशिप सहित कई प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व किया। इसके अलावा उन्होंने थाईलैंड ओपन, जॉर्डन अलवातानी चैंपियनशिप, ब्राज़ील ओपन, इजिप्ट ओपन और एशियन रीजनल चैंपियनशिप जैसे बड़े मंचों पर शानदार प्रदर्शन कर अनेक पदक अपने नाम किए।

राष्ट्रीय स्तर पर भी कुनाल का प्रदर्शन बेहद प्रभावशाली रहा है। वर्ष 2025-26 में उन्होंने राष्ट्रीय चैंपियनशिप में सिंगल्स स्वर्ण पदक, नेशनल रैंकिंग चैंपियनशिप में लगातार स्वर्ण और रजत पदक तथा राज्य चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर अपनी श्रेष्ठता साबित की। वहीं खेलो इंडिया पैरा गेम्स में भी उन्होंने देश के लिए कांस्य पदक हासिल किया।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुनाल ने 2026 गोल्ड कोस्ट ओपन में पुरुष सिंगल्स कांस्य पदक, 2024 जॉर्डन अलवातानी ओपन में पुरुष सिंगल्स और पुरुष युगल में रजत पदक, जबकि 2023 में जॉर्डन अलवातानी चैंपियनशिप में सिंगल्स स्वर्ण पदक जीतकर भारत का गौरव बढ़ाया।

कुनाल अरोड़ा का कहना है कि टेबल टेनिस उनके लिए केवल एक खेल नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, संघर्ष और जीवन को पूरी ताकत से जीने का माध्यम है। उनका उद्देश्य केवल मेडल जीतना नहीं, बल्कि थैलेसीमिया के प्रति समाज में जागरूकता फैलाना और उन लोगों को प्रेरित करना भी है जो जीवन में कठिन परिस्थितियों से गुजर रहे हैं।

आज कुनाल अरोड़ा लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। उनका संघर्ष यह साबित करता है कि अगर हौसले मजबूत हों तो बीमारी, कठिनाई और सीमाएं भी सफलता का रास्ता नहीं रोक सकतीं।
