उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव का रास्ता साफ करने के लिए योगी सरकार ने सोमवार को बड़ा फैसला लिया। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में समर्पित ओबीसी आयोग के गठन को मंजूरी दे दी गई। सरकार के इस कदम को पंचायत चुनाव की सबसे बड़ी बाधा दूर करने वाला माना जा रहा है।
दरअसल, प्रदेश में ओबीसी आयोग का कार्यकाल अक्टूबर 2025 में खत्म हो चुका था, जिसे सरकार ने अक्टूबर 2026 तक बढ़ा दिया था। हालांकि, कानूनी रूप से आयोग के पास “समर्पित आयोग” के अधिकार नहीं थे। नियमों के मुताबिक, आरक्षण से जुड़ा सर्वे केवल मूल कार्यकाल के दौरान ही कराया जा सकता है। इसी वजह से सरकार ने नए सिरे से समर्पित ओबीसी आयोग के गठन का फैसला किया।
अब आयोग प्रदेश में पिछड़े वर्गों का ‘रैपिड सर्वे’ कराएगा। इस सर्वे के जरिए ओबीसी आबादी के वास्तविक आंकड़े जुटाए जाएंगे, जिसके आधार पर पंचायत चुनाव में सीटों का आरक्षण तय किया जाएगा। माना जा रहा है कि आयोग के गठन के बाद आरक्षण प्रक्रिया तेज होगी और पंचायत चुनाव कराने की तैयारियां भी आगे बढ़ेंगी।
