मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने साफ कहा कि Election Commission of India को SIR कराने का अधिकार है और इसे उसकी वैधानिक शक्तियों के दायरे से बाहर नहीं माना जा सकता।
SIR के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया सामान्य प्रक्रिया से अलग जरूर हो सकती है, लेकिन इसे “अल्ट्रा वायर्स” यानी अधिकारों से परे कार्रवाई नहीं कहा जा सकता। अदालत ने फिलहाल चुनाव आयोग की शक्तियों को बरकरार रखा है।
सुनवाई के दौरान CJI Surya Kant ने कहा कि कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलों, घटनाक्रम और रिकॉर्ड पर मौजूद दस्तावेजों का अध्ययन किया है। इसके बाद अदालत ने तीन अहम सवाल तय किए हैं, जिन पर विस्तार से विचार किया जाएगा।
पहला सवाल यह है कि क्या चुनाव आयोग के पास SIR जैसी प्रक्रिया चलाने का कानूनी अधिकार है। दूसरा, क्या SIR के तहत की जा रही जांच किसी वैध उद्देश्य पर आधारित है और आयोग द्वारा अपनाए गए तरीके उस उद्देश्य के अनुरूप हैं या नहीं। तीसरा, क्या SIR की प्रक्रिया Representation of the People Act, 1950 और उससे जुड़े नियमों का उल्लंघन करती है।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को चुनाव आयोग के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, क्योंकि अदालत ने फिलहाल SIR प्रक्रिया पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है।
