केरल में बुधवार को उस वक्त सियासी पारा चढ़ गया, जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और उनकी बेटी वीणा विजयन से जुड़े ठिकानों पर कार्रवाई के लिए पहुंची। तिरुवनंतपुरम स्थित आवास पर छापेमारी खत्म होने के बाद बाहर निकल रही ईडी टीम को CPI(M) कार्यकर्ताओं के विरोध का सामना करना पड़ा। बड़ी संख्या में जुटे समर्थकों ने गेट पर नारेबाजी शुरू कर दी और अधिकारियों से तीखे सवाल पूछे। कुछ देर तक माहौल बेहद तनावपूर्ण बना रहा और धक्का-मुक्की जैसी स्थिति भी देखने को मिली। बाद में पार्टी नेताओं और स्थानीय पदाधिकारियों ने हस्तक्षेप कर कार्यकर्ताओं को शांत कराया, जिसके बाद अधिकारियों को वहां से बाहर निकाला गया।
ईडी की इस कार्रवाई ने केरल की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। CPI(M) महासचिव एमए बेबी ने केंद्र सरकार और केंद्रीय एजेंसियों पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्षी नेताओं को दबाने के लिए जांच एजेंसियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ईडी अब निष्पक्ष एजेंसी की तरह नहीं, बल्कि राजनीतिक हथियार की तरह काम कर रही है। एमए बेबी ने दिल्ली समेत कई राज्यों के मामलों का हवाला देते हुए कहा कि विपक्ष के बड़े नेताओं पर कार्रवाई कर डर का माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है।
जानकारी के मुताबिक ईडी ने केरल में कुल 10 स्थानों पर छापेमारी की, जिनमें पिनाराई विजयन और उनकी बेटी वीणा विजयन से जुड़े ठिकाने भी शामिल हैं। यह कार्रवाई कथित मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय गड़बड़ियों के मामले में की गई है। जांच का केंद्र वीणा विजयन की कंपनी एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड (ESPL) और कोच्चि मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड (CMRL) के बीच हुए कथित वित्तीय लेनदेन हैं। बताया जा रहा है कि अप्रैल 2025 में SFIO द्वारा दाखिल चार्जशीट के आधार पर ईडी ने यह कदम उठाया है। एजेंसी को शक है कि कंपनी के जरिए संदिग्ध भुगतान और आर्थिक अनियमितताएं की गईं, जिसकी अब गहराई से जांच की जा रही है।
जांच एजेंसियों के मुताबिक वीणा विजयन की कंपनी एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड पर आरोप है कि उसे कोच्चि की कंपनी CMRL से कई करोड़ रुपये का भुगतान मिला, जबकि बदले में तय सेवाएं नहीं दी गईं। दावा किया गया है कि साल 2017 में दोनों कंपनियों के बीच सॉफ्टवेयर और मार्केटिंग सेवाओं को लेकर एक समझौता हुआ था, लेकिन बाद की जांच में एजेंसियों को ऐसे पर्याप्त सबूत नहीं मिले, जिनसे यह साबित हो सके कि कॉन्ट्रैक्ट के तहत वास्तविक काम किया गया था। आरोप है कि 2018-19 से अगले तीन वर्षों तक कंपनी को लगातार भुगतान मिलता रहा।
इस मामले की शुरुआत 2019 में हुई आयकर विभाग की कार्रवाई से मानी जाती है। उस दौरान IT विभाग ने CMRL के ठिकानों पर छापेमारी की थी, जिसके बाद तैयार की गई जांच रिपोर्ट में एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस को किए गए कथित संदिग्ध भुगतानों का जिक्र सामने आया। इसके बाद मामला धीरे-धीरे राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर बड़ा मुद्दा बन गया।
बढ़ते विवाद और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को देखते हुए केंद्र सरकार ने जनवरी 2024 में Serious Fraud Investigation Office (SFIO) को जांच सौंप दी थी। SFIO को एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस, CMRL और केरल स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (KSIDC) से जुड़े वित्तीय लेनदेन की जांच का जिम्मा दिया गया। खास बात यह है कि CMRL में सरकारी संस्था KSIDC की करीब 13.4 फीसदी हिस्सेदारी भी है, जिसके चलते इस मामले ने और ज्यादा राजनीतिक महत्व हासिल कर लिया।
