उत्तर प्रदेश में बिजली आपूर्ति को लेकर राजनीति गरमा गई है। एक ओर विपक्ष लगातार बिजली कटौती के मुद्दे पर सरकार को घेर रहा है, वहीं ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने प्रदेश में किसी भी तरह के बिजली संकट से इनकार किया है। उन्होंने दावा किया कि राज्य में पर्याप्त बिजली उपलब्ध है और जो समस्याएं सामने आ रही हैं, वे मुख्य रूप से पुराने व जर्जर बिजली ढांचे की वजह से हैं। मंत्री ने इसके लिए पूर्ववर्ती सपा सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि उस दौर में लगाए गए तार, खंभे और महंगे बिजली खरीद समझौते आज भी विभाग पर बोझ बने हुए हैं।
इस बीच बिजली उपभोक्ताओं को जून महीने से एक और झटका लगने जा रहा है। उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) ने बिजली बिलों पर 10 प्रतिशत ईंधन अधिभार (फ्यूल सरचार्ज) लगाने का फैसला किया है। इसके तहत 100 रुपये के बिल पर उपभोक्ताओं को 10 रुपये अतिरिक्त चुकाने होंगे। विद्युत उपभोक्ता परिषद ने इस फैसले का विरोध करते हुए कहा है कि जब निगम पर उपभोक्ताओं का बकाया लंबित है, तब अतिरिक्त बोझ डालना उचित नहीं है।
ऊर्जा मंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार प्रदेश में रिकॉर्ड स्तर पर बिजली आपूर्ति कर रही है। उनके अनुसार, सपा सरकार के समय जहां करीब 13 हजार मेगावाट बिजली की आपूर्ति होती थी, वहीं अब 32 हजार मेगावाट तक की मांग पूरी की जा रही है। उन्होंने बताया कि राज्य में 4500 मेगावाट नई थर्मल क्षमता जोड़ी गई है, घाटमपुर की 600 मेगावाट यूनिट जल्द शुरू होगी और मेजा में 2400 मेगावाट की नई परियोजना को मंजूरी मिल चुकी है।
हालांकि सरकार के दावों के बीच मथुरा में बिजली संकट ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी। राधापुरम क्षेत्र में 24 घंटे से अधिक समय तक बिजली आपूर्ति बाधित रहने से नाराज लोगों ने बिजली घर पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया और सड़क जाम कर दी। लंबे समय तक बिजली न मिलने से पानी की सप्लाई और इनवर्टर भी ठप हो गए। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अधिकारी बिजली बहाल करने को लेकर कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए, जिससे उनका आक्रोश और बढ़ गया।
