राम मंदिर में चढ़ावे और आभूषणों से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच कर रही एसआईटी के सामने सबसे बड़ी चुनौती ठोस साक्ष्य जुटाने की बनी हुई है। जांच में पता चला है कि मंदिर परिसर के सीसीटीवी कैमरों का बैकअप केवल 45 दिनों तक सुरक्षित रखा जाता है, जिसके बाद फुटेज स्वतः हट जाती है। ऐसे में वर्षों पुरानी गतिविधियों की जांच करना और कथित गड़बड़ियों की शुरुआत का सटीक समय निर्धारित करना मुश्किल हो गया है।
जांच के दौरान कुछ सीसीटीवी रिकॉर्डिंग में संभावित छेड़छाड़ के संकेत भी मिले हैं। अब एसआईटी फोरेंसिक विशेषज्ञों की मदद से अधिक से अधिक पुरानी फुटेज रिकवर करने का प्रयास कर रही है। हालांकि सीमित डिजिटल साक्ष्यों के कारण जांच एजेंसी को कर्मचारियों, पदाधिकारियों और पहले गिरफ्तार किए जा चुके आरोपियों के बयानों पर भी काफी हद तक निर्भर रहना पड़ रहा है। पूछताछ में कई बयानों में विरोधाभास सामने आए हैं, जिन्हें जांच का अहम आधार माना जा रहा है। इसी वजह से मामले की जांच लंबी और कई स्तरों पर आगे बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
इस बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या दौरे के दौरान कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया है और दोषी कोई भी हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि बिना प्रमाण के आरोप लगाने और अनावश्यक बयानबाजी से बचें। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि किसी के पास कोई साक्ष्य या लिखित प्रमाण है तो उसे एसआईटी को सौंपना चाहिए, ताकि जांच तथ्यों के आधार पर आगे बढ़ सके। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जांच पूरी होने के बाद सच्चाई सामने आएगी और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।
