मुरादाबाद। मुरादाबाद के चर्चित कोचिंग संस्थान स्कॉलर डेन और इसके संचालक विवेक ठाकुर की मुश्किलें आने वाले दिनों में और बढ़ सकती हैं। संस्थान के संचालन को लेकर उठ रहे विवादों के बीच अब मामले को इलाहाबाद हाईकोर्ट तक ले जाने की तैयारी की जा रही है। जानकारी के अनुसार कुछ सामाजिक कार्यकर्ता, अभिभावक और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े लोग इस पूरे प्रकरण को लेकर जनहित याचिका (PIL) दाखिल करने की तैयारी में जुटे हैं।
प्रस्तावित याचिका में आरोप लगाया जा सकता है कि स्कॉलर डेन में लंबे समय से स्कूल समय के दौरान ही कोचिंग कक्षाएं संचालित की जा रही हैं, जबकि बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं अपने विद्यालयों में उपस्थित रहने के बजाय कोचिंग संस्थान में पढ़ाई करते देखे जाते हैं। इस व्यवस्था को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब छात्र स्कूल के बजाय कोचिंग संस्थान में मौजूद रहते हैं, तब संबंधित स्कूलों में उनकी उपस्थिति किस आधार पर दर्ज की जाती है।
सूत्रों का दावा है कि कई विद्यालयों के छात्रों को सुबह से ही वाहनों के माध्यम से कोचिंग संस्थान लाया जाता है और वे दिनभर वहीं पढ़ाई करते हैं। ऐसे में शिक्षा विभाग और संबंधित विद्यालयों की भूमिका को लेकर भी गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि यदि छात्र नियमित रूप से विद्यालय नहीं जा रहे हैं, तो उनकी उपस्थिति दर्ज होना शिक्षा नियमों का गंभीर उल्लंघन माना जा सकता है।
प्रस्तावित PIL में हाईकोर्ट से पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग किए जाने की चर्चा है। साथ ही यह भी मांग उठाई जा सकती है कि संबंधित विद्यालयों के उपस्थिति रजिस्टर, सीसीटीवी फुटेज, परिवहन व्यवस्था और छात्रों की वास्तविक उपस्थिति का सत्यापन कराया जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि छात्र स्कूल में पढ़ रहे थे या कोचिंग संस्थान में।
मामले ने इसलिए भी तूल पकड़ लिया है क्योंकि स्कॉलर डेन और इसके संचालक विवेक ठाकुर पहले से ही विभिन्न विवादों और आरोपों को लेकर चर्चा में रहे हैं। ऐसे में स्कूल समय में कोचिंग संचालन और कथित फर्जी उपस्थिति के आरोपों ने इस विवाद को और गंभीर बना दिया है।
यदि हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल होती है और न्यायालय इस मामले का संज्ञान लेता है, तो न केवल कोचिंग संस्थान बल्कि संबंधित विद्यालयों और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है। शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का मानना है कि यह मामला केवल एक संस्थान तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र की पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़ा विषय है।
फिलहाल जनहित याचिका दाखिल किए जाने की प्रक्रिया जारी बताई जा रही है। याचिका दाखिल होने और न्यायालय द्वारा सुनवाई स्वीकार किए जाने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी@शांतनु/INN
