अमरोहा। उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले में सरकारी फुटपाथों पर दबंगों के अवैध कब्जे और उन्हें किराए पर उठाए जाने के खेल ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की खुलेआम धज्जियाँ उड़ा दी हैं, जिससे आम नागरिकों का पैदल चलना दूभर हो गया है। फुटपाथ न होने के कारण लोग छोटी दूरियों के लिए भी अब टू-व्हीलर का सहारा लेने लगे हैं, और इसी बढ़ी हुई भीड़ व सड़क हादसों के बीच ट्रैफिक पुलिस द्वारा दुपहिया वाहन चालकों पर प्रतिदिन लाखों रुपए का भारी जुर्माना थोपा जा रहा है, जिससे जनता में गहरा आक्रोश व्याप्त है।
बाइक सवारों का कहना है कि जब सड़क पर पैदल चलने के लिए सुरक्षित जगह ही नहीं बची है, तो प्रशासन या तो फुटपाथों को दबंगों के कब्जे से मुक्त कराए, अन्यथा गाहे-बगाहे जुर्माना थोपकर जनता का उत्पीड़न बंद करे। मामले को गंभीरता से लेते हुए उपजिलाधिकारी शैलेश कुमार दूबे ने स्पष्ट किया है कि गजरौला-चांदपुर स्टेट हाईवे-51, नेशनल हाईवे-09, कलाली रोड तथा गजरौला स्थित धनौरा रोडवेज बस स्टैंड सहित चौराहों एवं सरकारी फुटपाथों पर अवैध कब्जे या उन्हें किराए पर उठाए जाने का मामला संज्ञान में आने पर आरोपियों के विरुद्ध कड़ी विधिक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने फुटपाथों को पूरी तरह खाली कराने के निर्देश देते हुए संयुक्त टीम गठित कर शीघ्र व्यापक अभियान चलाने की बात कही है।

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आँकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 में सड़क हादसों में जान गँवाने वाले 1.75 लाख लोगों में से 1.1 लाख से अधिक दुपहिया सवार और पैदल यात्री ही थे, जो सड़क सुरक्षा नीतियों में इन दोनों वर्गों की लगातार अनदेखी का स्पष्ट प्रमाण है। सर्वोच्च न्यायालय पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि फुटपाथों पर सुरक्षित पैदल चलना संविधान के अनुच्छेद 19(1)(d) के तहत नागरिकों का मौलिक अधिकार है तथा सड़कों पर पहला हक पैदल यात्रियों का है। इसके बावजूद स्थानीय निकायों एवं संबंधित विभागों की लापरवाही के चलते अधिकांश शहरों में फुटपाथ या तो गायब हैं या पूर्णतः अतिक्रमण की चपेट में हैं। शीर्ष अदालत ने स्थानीय निकायों और सरकार को फुटपाथों के निर्माण व रखरखाव सुनिश्चित करने तथा जिम्मेदारी न निभाने वाले विभागों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई के निर्देश भी दिए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षित फुटपाथ न केवल सड़क सुरक्षा बल्कि पर्यावरण एवं जनस्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी अत्यंत आवश्यक हैं, क्योंकि इससे छोटी दूरी के लिए वाहनों का उपयोग घटेगा और प्रदूषण व यातायात दबाव दोनों में राहत मिलेगी।
