मुरादाबाद। शहर के चर्चित स्कॉलर डेन कोचिंग संस्थान और उसके संचालक विवेक ठाकुर को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। अब मुरादाबाद के वरिष्ठ अधिवक्ता विनय खन्ना ने विवेक ठाकुर के उस दावे पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, जिसमें वह स्वयं को IIT खड़गपुर का पूर्व छात्र (एलुमनाई) बताते हैं। अधिवक्ता ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति देश के प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थान से शिक्षा प्राप्त करने का दावा करता है, तो उसकी शैक्षणिक योग्यता और दावे की सत्यता सार्वजनिक रूप से स्पष्ट होनी चाहिए।

विनय खन्ना ने कहा कि IIT जैसी संस्थाओं में प्रवेश प्राप्त करना और वहां से शिक्षा पूर्ण करना अत्यंत कठिन प्रक्रिया है। ऐसे संस्थानों से निकलने वाले छात्र-छात्राएं अपनी विद्वता, अनुशासन, सामाजिक व्यवहार और पेशेवर नैतिकता के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने कहा कि स्कॉलर डेन संचालक विवेक ठाकुर के आचरण और उनके संस्थान को लेकर लगातार सामने आ रहे विवादों को देखकर यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या वह वास्तव में IIT खड़गपुर से शिक्षित हैं।
उन्होंने सार्वजनिक रूप से प्रश्न किया कि विवेक ठाकुर यह स्पष्ट करें कि उन्होंने अपना ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन किस संस्थान से और किस वर्ष में किया है। यदि वह IIT खड़गपुर के छात्र रहे हैं तो इसकी आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक करने में कोई संकोच नहीं होना चाहिए।
IIT खड़गपुर को भेजा ई-मेल
विनय खन्ना ने बताया कि उन्होंने स्वयं इस मामले की सच्चाई जानने के लिए IIT खड़गपुर प्रशासन को ई-मेल भेजकर जानकारी मांगी है। उन्होंने संस्थान से अनुरोध किया है कि यह स्पष्ट किया जाए कि विवेक ठाकुर वास्तव में वहां के छात्र रहे हैं अथवा नहीं।
उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति प्रतिष्ठित संस्थान का नाम लेकर स्वयं की छवि बनाता है और उसी आधार पर छात्रों व अभिभावकों को आकर्षित करता है, तो उस दावे की सत्यता की जांच होना आवश्यक है।
स्कूल टाइम में कोचिंग संचालन पर भी उठाए सवाल
वरिष्ठ अधिवक्ता ने स्कॉलर डेन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि लंबे समय से यह आरोप सामने आते रहे हैं कि अनेक स्कूलों के छात्र नियमित स्कूल में उपस्थित रहने के बजाय सुबह से शाम तक कोचिंग संस्थान में पढ़ाई करते हैं। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा हो रहा है तो यह शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
उन्होंने मांग की कि शिक्षा विभाग यह जांच करे कि स्कूल समय में कोचिंग संस्थान में मौजूद रहने वाले छात्रों की स्कूलों में उपस्थिति किस आधार पर दर्ज की जा रही है। यदि फर्जी उपस्थिति दर्ज की जा रही है तो संबंधित स्कूलों और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।
“स्कूलों और कोचिंग के गठजोड़ की जांच हो”
विनय खन्ना ने आरोप लगाया कि यदि स्कूलों और कोचिंग संस्थानों के बीच किसी प्रकार का अनधिकृत समन्वय चल रहा है, तो इसकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास है, न कि केवल परीक्षा परिणामों के नाम पर उन्हें नियमित विद्यालयी शिक्षा से दूर करना।
अभिभावकों से भी पूछे सवाल
अधिवक्ता ने अभिभावकों से भी अपील करते हुए कहा कि किसी भी संस्थान के प्रचार-प्रसार और बड़े-बड़े दावों पर भरोसा करने से पहले उसकी प्रमाणिकता की जांच अवश्य करें। उन्होंने कहा कि यदि कोई कोचिंग संस्थान अपने विज्ञापनों में स्वयं को किसी प्रतिष्ठित संस्थान से जुड़ा बताता है, तो अभिभावकों को उसके प्रमाण भी देखने चाहिए।
जांच और पारदर्शिता की मांग तेज
विनय खन्ना ने कहा कि पूरे मामले में पारदर्शिता लाने के लिए विवेक ठाकुर को अपनी शैक्षणिक योग्यता, डिग्री और शैक्षणिक रिकॉर्ड सार्वजनिक करना चाहिए। साथ ही शिक्षा विभाग और संबंधित एजेंसियों को भी स्कॉलर डेन की कार्यप्रणाली, स्कूल समय में कोचिंग संचालन तथा छात्रों की उपस्थिति संबंधी आरोपों की जांच करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि सभी दावे सही हैं तो जांच से स्थिति स्पष्ट हो जाएगी, और यदि कोई तथ्य छिपाया गया है तो वह भी सामने आ जाएगा। उधर प्रकरण में स्कॉलर डेन संचालक का पक्ष नहीं मिल पाया। फिलहाल शहर में स्कॉलर डेन और उसके संचालक को लेकर उठे सवालों ने शिक्षा जगत में नई बहस छेड़ दी है@शांतनु/INN
